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सलमान खान फार्म हाउस विवाद, भाईजान के पड़ोसी को लगाई हाईकोर्ट ने फटकार, कहा- सोशल मीडिया मानहानि का मंच नहीं

Salman Khan case
आधुनिक दौर में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बन चुका है, लेकिन क्या इसका उपयोग किसी निजी कानूनी विवाद को सार्वजनिक रूप से हवा देने या किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है? इस गंभीर विषय पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। 
 
कोर्ट ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान और उनके पनवेल स्थित 'अर्पिता फार्महाउस' के पड़ोसी केतन कक्कड़ के बीच चल रहे संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया का एक्सेस होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इसका इस्तेमाल किसी को बदनाम करने के लिए किया जाए।
यह कानूनी लड़ाई जनवरी 2022 से चल रही है, जब सलमान खान ने अपने पड़ोसी केतन कक्कड़ के खिलाफ दीवानी अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। सलमान खान का आरोप है कि केतन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब इंटरव्यूज के जरिए उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे, भड़काऊ और मनगढ़ंत आरोप लगाए हैं। 
 
सलमान खान के वकीलों के अनुसार, इन वीडियोज में कुछ ऐसी टिप्पणियां भी शामिल थीं, जो सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की क्षमता रखती थीं। दूसरी तरफ, केतन कक्कड़ का दावा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है और उनके बयान पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित हैं। 
 
चेतन कक्कड़ का आरोप है कि सलमान खान ने पनवेल में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है और उनके प्लॉट तक जाने वाले रास्ते को बाधित कर दिया है। विवाद तब और बढ़ गया जब अधिकारियों ने कक्कड़ के एक प्रस्तावित भूमि सौदे को अवैध मानकर रद्द कर दिया, जिसका आरोप कक्कड़ ने सीधे तौर पर सलमान खान और उनके परिवार पर मढ़ दिया।
 
बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
निचली अदालत से अंतरिम राहत न मिलने के बाद सलमान खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने केतन कक्कड़ के वकील को मौखिक रूप से सुझाव दिया कि वे अपने मुवक्किल से बात कर विवादित पोस्ट, ट्वीट्स और वीडियो को स्वेच्छा से हटाने पर विचार करें।
जस्टिस देशमुख ने कहा, सिर्फ इसलिए कि किसी के पास सोशल मीडिया तक पहुंच है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे किसी भी व्यक्ति—चाहे वह आम नागरिक हो या कोई सेलिब्रिटी—के बारे में केवल उसे बदनाम करने के लिए वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
 
अदालत ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई कि लोग अपनी कानूनी शिकायतों को संबंधित सक्षम अधिकारियों के पास ले जाने के बजाय सोशल मीडिया पर 'मीडिया ट्रायल' शुरू कर देते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अगर केतन कक्कड़ इन वीडियो को हटा भी लेते हैं, तो मुख्य संपत्ति विवाद में उनकी कानूनी स्थिति या स्टैंड पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
 
हाई कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अदालत का कीमती समय इस बात की जांच करने में बर्बाद हो रहा है कि कौन से सोशल मीडिया लिंक चालू रहने चाहिए और कौन से डिलीट होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई आपत्तिजनक कंटेंट किसी तीसरे पक्ष द्वारा भी री-अपलोड किया गया है, तो भी सोशल मीडिया मध्यस्थों से संपर्क कर उसे हटवाया जा सकता है। 
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