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'काला हिरण' का टीजर रिलीज होते ही हाईकोर्ट पहुंचे सलमान खान, मेकर्स को नोटिस जारी
प्रोड्यूसर अमित जानी की फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' अपनी घोषणा के वक्त से ही विवादों में घिरी हुई है। हाल ही में रिलीजहुए इस फिल्म के टीजर के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
सलमान खान ने इस फिल्म की रिलीज, टीज़र, ट्रेलर और किसी भी तरह के प्रमोशन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भरत श्रीनेत और कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे सहित सभी संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। सलमान खान की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने अदालत के सामने कई गंभीर दलीलें पेश कीं। सलमान खान की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित हैं-
पर्सनैलिटी राइट्स का खुला उल्लंघन
सलमान खान के वकील ने कोर्ट को याद दिलाया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही 11 दिसंबर, 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सलमान खान के 'पर्सनैलिटी राइट्स' को सुरक्षित किया गया था। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति या प्रोडक्शन हाउस सलमान खान की अनुमति के बिना उनके नाम, आवाज, चेहरे के हाव-भाव या उनसे जुड़ी किसी भी विशिष्ट पहचान का व्यावसायिक उपयोग नहीं कर सकता।
'ट्रेडमार्क' फिरोजा ब्रेसलेट का इस्तेमाल
याचिका में 29 मई को रिलीज हुए फिल्म के एक पोस्टर का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। सलमान के वकीलों का कहना है कि पोस्टर में दिख रहा मुख्य किरदार न सिर्फ पूरी तरह सलमान खान जैसा दिखता है, बल्कि उसने हाथ में एक ब्रेसलेट भी पहन रखा है। यह नीले फिरोजा पत्थर वाला ब्रेसलेट दुनिया भर में सलमान खान की सबसे बड़ी और विशिष्ट व्यक्तिगत पहचान है। बिना अनुमति इसका इस्तेमाल करना सीधे तौर पर दर्शकों को गुमराह करने और अभिनेता की पहचान का व्यावसायिक लाभ उठाने की कोशिश है।
कानूनन बरी, लेकिन फिल्म में हाथ में बंदूक
पोस्टर और ट्रेलर में मुख्य किरदार को हाथ में बंदूक थामे हुए दिखाया गया है, जो 1998 के काले हिरण शिकार मामले और आर्म्स एक्ट से जुड़े घटनाक्रमों की ओर इशारा करता है। सलमान के वकील ने दलील दी कि अभिनेता को आर्म्स एक्ट मामले में अदालत द्वारा पहले ही पूरी तरह बरी किया जा चुका है। ऐसे में उन्हें बंदूक के साथ दिखाना एक भ्रामक और नकारात्मक नैरेटिव तैयार करता है, जिससे समाज में उनकी छवि खराब हो सकती है।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और पेंडिंग कोर्ट केस का कनेक्शन
फिल्म 'काला हिरन: द बैटल फॉर लेगेसी' को लेकर बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि यह फिल्म सलमान खान और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के बीच चल रही कथित दुश्मनी और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड जैसे संवेदनशील बैकड्रॉप पर आधारित है। फिल्म के निर्माता अमित जानी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और इंटरव्यूज में भी इस बात के संकेत दिए थे।
सलमान खान की लीगल टीम ने अदालत में कहा कि काले हिरण शिकार से जुड़े मामले अभी भी उच्च अदालतों में लंबित हैं। चार एफआईआर में से तीन में सलमान बरी हो चुके हैं, जबकि एक मामले में स्पेशल लीव पेटिशन पर सुनवाई जारी है। ऐसे में इस विषय पर कोई भी कमर्शियल फिल्म या ड्रामेटाइजेशन सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकता है और अभिनेता के 'फेयर ट्रायल' के अधिकार में बाधा डाल सकता है।
क्या रुक जाएगी 'काला हिरण' की रिलीज?
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म पर कोई अंतरिम प्रतिबंध (Injunction) नहीं लगाया है, लेकिन मेकर्स से जवाब तलब कर लिया है। अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सलमान के फैंस की नजरें 19 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि निर्माता अमित जानी यह साबित नहीं कर पाते कि उनकी फिल्म सलमान खान के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर रही है, तो फिल्म की रिलीज पर लंबा ग्रहण लग सकता है।
