जब पिता की फिल्में हो गईं फ्लॉप, रुपाली गांगुली को करना पड़ा था वेट्रेस का काम
भारतीय टेलीविजन जगत में जब भी सशक्त महिला किरदारों की बात होगी, रुपाली गांगुली का नाम सबसे ऊपर आएगा। 5 अप्रैल 1977 को जन्मी रुपाली आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। 'अनुपमा' के रूप में घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली रूपाली के पास आज शोहरत और दौलत की कमी नहीं है।
इस मुकाम तक पहुंचने के लिए रुपाली गांगुली ने जो कांटे भरे रास्ते तय किए हैं, वह बेहद प्रेरणादायक हैं। रुपाली के पिता अनिल गांगुली बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक थे, जिन्होंने 'कोरा कागज' और 'तपस्या' जैसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्में बनाईं।
रुपाली ने महज 7 साल की उम्र में फिल्म 'साहेब' (1985) से बाल कलाकार के रूप में करियर शुरू किया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक दौर ऐसा आया जब उनके पिता की फिल्में (जैसे 'दुश्मन देवता') बॉक्स ऑफिस पर लगातार फ्लॉप होने लगीं।
जब सड़क पर आ गया था परिवार
एक इंटरव्यू में रुपाली ने भावुक होते हुए बताया था कि उनके पिता ने फिल्में बनाने के लिए अपना घर और गहने तक बेच दिए थे। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें वर्ली से पृथ्वी थिएटर तक 15 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था क्योंकि बस के पैसे नहीं होते थे। परिवार की मदद के लिए उन्होंने होटल मैनेजमेंट के दौरान वेट्रेस का काम किया, जहां उन्हें 180 रुपए प्रति घंटा मिलते थे। उन्होंने पार्टियों में कैटरिंग तक की ताकि घर का खर्च चल सके।
रूपाली के करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2000 में सीरियल 'सुकन्या' से उन्होंने टीवी पर कदम रखा। टीवी सीरीयल साराभाई वर्सेस साराभाई में 'मोनिषा साराभाई' के किरदार ने उन्हें एक कल्ट पहचान दी। उनकी कॉमिक टाइमिंग आज भी याद की जाती है।
करीब 7 साल के लंबे ब्रेक के बाद 2020 में उन्होंने 'अनुपमा' के साथ वापसी की। इस शो ने टीवी की दुनिया के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और उन्हें 'हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस' बना दिया।
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WD Entertainment Desk