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कभी चॉल में रहने को मजबूर थीं महिमा मकवाना, आज मुंबई में हैं 2 आलीशान घर और करोड़ों की दौलत

Mahima Makwana
नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज़ हुई सीरीज 'मुसाफिर कैफे' इन दिनों दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा में है। विक्रांत मैसी के साथ सीरीज में 'प्रीति' का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस महिमा मकवाना की हर तरफ तारीफ हो रही है। 
 
लेकिन पर्दे पर अपनी अदाकारी और खूबसूरती से सभी का दिल जीतने वाली महिमा का असल ज़िंदगी का सफर आसान नहीं रहा है। मात्र 26 साल की उम्र में मुंबई जैसे शहर में 2-2 लग्जरी घरों की मालकिन बनने वाली महिमा ने बचपन में बेहद गरीबी और लाचारी का सामना किया है।
 
5 महीने की उम्र में उठा पिता का साया, चॉल में बीता बचपन  
5 अगस्त 1999 को मुंबई में जन्मी महिमा मकवाना जब सिर्फ 5 महीने की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में कमाने वाला कोई नहीं था। महिमा की मां ने एक एनजीओ में काम करके बेहद कम पैसों में महिमा और उनके 9 साल के बड़े भाई की परवरिश की। आर्थिक तंगी इतनी ज्यादा थी कि पूरे परिवार को मुंबई की एक छोटी सी चॉल में दिन गुजारने पड़े।
 
महिमा ने अपने एक इंटरव्यू में इस दौर को याद करते हुए बताया था कि जब वे चॉल में रहते थे, तो रिश्तेदार और आसपास के लोग उन्हें अक्सर नीची नज़र से देखते थे। हैरानी की बात यह है कि महिमा मकवाना का शुरुआती दौर में एक्टिंग में कोई मन नहीं लगता था। वे बस परिवार की आर्थिक मदद करने और अपनी मां का बोझ कम करने के लिए इस इंडस्ट्री में आईं। 
 
महिमा ने कहा था, मैं आधे दिन स्कूल जाती, फिर लोकल बस पकड़कर घंटों ऑडिशन देने भटकती और थक-हारकर घर लौटती। मेरी माँ मुझे लगातार आगे बढ़ने की हिम्मत देती थीं। 
 
एक दिन महिमा की मां ने उनसे भावुक होकर कहा कि वे इस दुनिया को छोड़ने से पहले अपने नाम का एक घर देखना चाहती हैं। मां के इस सपने को महिमा ने अपना सबसे बड़ा मकसद बना लिया। टीवी शो 'सपने सुहाने लड़कपन के' की जबरदस्त सफलता के बाद, महज 14 साल की उम्र में महिमा ने मुंबई के मीरा रोड में अपना पहला घर खरीदा और साथ ही अपनी पहली कार भी ली। आज 26 साल की उम्र में उनके पास मुंबई में दो शानदार घर हैं।
 
'बालिका वधू' के सेट पर मिला अपमान, जो बना टर्निंग पॉइंट  
टीवी पर बतौर लीड एक्ट्रेस जगह बनाने से पहले महिमा ने कई सालों तक चाइल्ड आर्टिस्ट और जूनियर आर्टिस्ट के रूप में धक्के खाए। कम उम्र में ही उन्हें रिजेक्शन और भेदभाव झेलना पड़ा। महिमा ने लोकप्रिय धारावाहिक 'बालिका वधू' के सेट का एक वाक्या शेयर करते हुए बताया था कि जब वे लगभग 9-10 साल की थीं, तब एक सीन के दौरान वे नर्वस हो गईं और अपने डायलॉग भूल गईं। तब सेट पर डायरेक्टर ने सबके सामने उनसे कहा था— "अगर तुम्हें एक्टिंग नहीं आती, तो तुम यहां क्यों आई हो?"  
 
इस बात से महिमा बेहद अपमानित महसूस करने लगीं और रोते हुए घर लौटीं। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय उसी अपमान को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने पूरी रात जागकर डायलॉग्स रटे, अपनी एक्टिंग पर कड़ी मेहनत की और इसके बाद उन्हें लीड रोल मिलने शुरू हुए, जिसके बाद महिमा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।  
 
टीवी का जाना-माना चेहरा बनने के बाद भी महिमा का संघर्ष थमा नहीं। वे लगातार बड़ी फिल्मों और विज्ञापनों के लिए ऑडिशन देती रहीं। साल 2017 में तेलुगु फिल्म 'वेंकटपुरम' से साउथ डेब्यू करने के बाद महिमा को अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल मोड़ पर सलमान खान प्रोडक्शंस की फिल्म 'अंतिम: द फाइनल ट्रुथ' (2021) का ऑफर मिला, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
 
हाल ही में रिलीज हुई नेटफ़्लिक्स वेब सीरीज 'मुसाफिर कैफे' में विक्रांत मैसी के अपोजिट उनके अभिनय की चौतरफा सराहना हो रही है। चॉल के छोटे से कमरे से शुरू हुआ महिमा मकवाना का यह सफर आज के युवाओं के लिए इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो आपकी शुरुआत कभी आपका भविष्य तय नहीं कर सकती।
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