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Last Updated : शुक्रवार, 15 मई 2026 (14:00 IST)

जब दूरदर्शन ने कर दिया था माधुरी दीक्षित को रिजेक्ट, बॉलीवुड ने बनाया क्वीन

Madhuri Dixit rejection story
भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर 'ग्रेस' और 'टैलेंट' का कोई परफेक्ट कॉम्बिनेशन है, तो वो नाम है— माधुरी दीक्षित। अपनी मुस्कान और बेहतरीन डांस से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली माधुरी को आज 'धक-धक गर्ल' कहा जाता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस अभिनेत्री की एक झलक के लिए आज फैंस घंटों इंतजार करते हैं, उन्हें कभी "रिजेक्ट" कर दिया गया था? वो भी यह कहकर कि उनकी स्टार कास्ट में 'दम' नहीं है।
 
1984: वो साल जब एक सपना टूटते-टूटते बचा
यह कहानी साल 1984 की है। माधुरी दीक्षित उस समय ग्लैमर की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही थीं। मशहूर डायरेक्टर अनिल तेजानी दूरदर्शन के लिए एक टीवी सीरियल बना रहे थे, जिसका नाम था ‘बॉम्बे मेरी है’।
 
इस शो के लिए माधुरी दीक्षित को लीड रोल के लिए चुना गया था। उनके अपोजिट उस समय के मंझे हुए कलाकार बेंजामिन गिलानी थे और साथ में मजहर खान जैसे नाम भी जुड़े थे। माधुरी के लिए यह एक बहुत बड़ा मौका था क्योंकि उस दौर में दूरदर्शन ही घर-घर तक पहुंचने का एकमात्र जरिया था।
दूरदर्शन का 'रिजेक्शन' जिसने बदल दी किस्मत
शो का पायलट एपिसोड (पहला एपिसोड) तैयार हुआ और अप्रूवल के लिए दूरदर्शन के अधिकारियों के पास भेजा गया। सबको उम्मीद थी कि शो पास हो जाएगा, लेकिन जवाब ने सबको चौंका दिया। दूरदर्शन के अधिकारियों ने यह कहते हुए शो को टेलीकास्ट करने से मना कर दिया कि, "कहानी तो ठीक है, लेकिन इसकी स्टार कास्ट में कोई दम नहीं है।"
 
जिस माधुरी दीक्षित को आज बॉलीवुड की 'क्वीन' माना जाता है, उन्हें दूरदर्शन ने 'बिना दम वाली कास्ट' करार दिया था। इस रिजेक्शन के बाद डायरेक्टर अनिल तेजानी इतने निराश हुए कि उन्होंने उस सीरियल प्रोजेक्ट को ही बंद कर दिया।
 
रिजेक्शन बना वरदान 
कहते हैं कि जब एक रास्ता बंद होता है, तो ईश्वर दूसरा और बड़ा रास्ता खोल देता है। अगर वह टीवी शो पास हो जाता, तो शायद माधुरी एक टीवी एक्ट्रेस बनकर रह जातीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसी साल (1984) राजश्री प्रोडक्शन्स की नजर माधुरी पर पड़ी और उन्हें फिल्म ‘अबोध’ ऑफर हुई। हालांकि, 'अबोध' बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा धमाका नहीं कर पाई, लेकिन इंडस्ट्री को एक ऐसी लड़की मिल गई थी जिसकी आंखों में बड़े सपने थे।
 
अगले कुछ सालों तक माधुरी ने संघर्ष किया, लेकिन 1988 में एन. चंद्रा की फिल्म ‘तेजाब’ ने इतिहास रच दिया। 'मोहिनी' बनकर जब माधुरी ने ‘एक दो तीन’ पर डांस किया, तो पूरा देश झूम उठा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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