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जब करिश्मा कपूर ने तोड़ी कपूर खानदान की परंपरा, रचा बॉलीवुड में इतिहास
बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर 25 जून को अपना जन्मदिन मना रही हैं। कपूर खानदान की चौथी पीढ़ी की इस लाडली ने न सिर्फ अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि 90 के दशक में हिंदी सिनेमा के पर्दे पर राज भी किया। 1974 में मुंबई में जन्मी करिश्मा को अभिनय की कला विरासत में मिली थी।
करिश्मा के पिता रणधीर कपूर और मां बबीता अपने जमाने के दिग्गज कलाकार थे। लेकिन करिश्मा के लिए यह सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्होंने उस दौर में फिल्मों में कदम रखा जब कपूर खानदान की बेटियों को फिल्मों में काम करने की इजाजत नहीं थी। परंपराओं को तोड़कर, महज 17 साल की उम्र में करिश्मा ने 1991 की फिल्म 'प्रेम कैदी' से अपने सिने करियर की शुरुआत की।
'राजा हिंदुस्तानी' से चमका किस्मत का सितारा
शुरुआती कुछ संघर्षों के बाद, साल 1996 करिश्मा कपूर के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस साल फिल्म 'राजा हिंदुस्तानी' ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी और 'परदेसी परदेसी' जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में स्टार बना दिया। इस फिल्म में उनके मेकओवर और बेहतरीन अभिनय ने समीक्षकों को भी हैरान कर दिया और उन्हें करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
जब माधुरी दीक्षित के सामने फीकी नहीं पड़ीं 'लोलो'
साल 1997 में यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी 'दिल तो पागल है' करिश्मा के करियर की एक और ऐतिहासिक फिल्म थी। इस फिल्म में उनका सीधा मुकाबला डांसिंग क्वीन माधुरी दीक्षित से था। इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना था कि माधुरी के सामने करिश्मा दब जाएंगी, लेकिन लोलो ने अपने सधे हुए अभिनय, बेमिसाल डांस और एनर्जी से न सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचा बल्कि इतिहास रच दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
90 के दशक के अंत तक करिश्मा पर यह ठप्पा लगने लगा था कि वह सिर्फ कमर्शियल और ग्लैमरस रोल ही कर सकती हैं। इस रूढ़िवादिता को तोड़ने में मशहूर समानांतर सिनेमा के निर्देशक श्याम बेनेगल ने उनकी मदद की। उन्होंने करिश्मा को लेकर फिल्म 'जुबैदा' बनाई। इस फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री रेखा की मौजूदगी के बावजूद करिश्मा ने टाइटल रोल में ऐसा जानदार अभिनय किया कि हर कोई देखता रह गया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके तुरंत बाद साल 2000 में आई फिल्म 'फिजा' के लिए भी उन्होंने अपनी दूसरी बेस्ट एक्ट्रेस की फिल्मफेयर ट्रॉफी जीती।
गोविंदा के साथ 'नंबर वन' ब्लॉकबस्टर जोड़ी
हिंदी सिनेमा का इतिहास तब तक अधूरा है, जब तक करिश्मा कपूर और गोविंदा की जोड़ी का जिक्र न हो। साल 1993 में फिल्म 'मुकाबला' से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर सफलता की गारंटी बन गया। इस जोड़ी ने राजा बाबू, कुली नंबर वन, साजन चले ससुराल, हीरो नंबर वन, और हसीना मान जाएगी जैसी दर्जनों सुपरहिट कॉमेडी फिल्में दीं। आज भी इनके गानों के हुक स्टेप्स शादियों और पार्टियों की जान होते हैं।
साल 2003 में उद्योगपति संजय कपूर से शादी करने के बाद करिश्मा ने अपने करियर के पीक पर फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने फिल्म 'मेरे जीवन साथी' और साल 2012 में 'डेंजरस इश्क' से बड़े पर्दे पर वापसी की। करिश्मा ने छोटे पर्दे पर भी बतौर होस्ट और एक्ट्रेस काम किया और दर्शकों का मनोरंजन किया। अपने दो दशक लंबे शानदार करियर में लगभग 60 फिल्मों में काम करने वाली करिश्मा कपूर आज भी फिटनेस और स्टाइल के मामले में नई जनरेशन की एक्ट्रेसेस को टक्कर देती हैं।
