संजय लीला भंसाली–केतन मेहता की ऐतिहासिक साझेदारी, 'जय सोमनाथ' में दिखेगी मंदिर पर हुए हमलों की पूरी कहानी
सदियों से सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक प्रार्थना की जगह नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की कभी न हारने वाली हिम्मत का प्रतीक रहा है। अब 'जय सोमनाथ' के साथ दिग्गज फिल्म मेकर्स संजय लीला भंसाली और केतन मेहता भारत के इस ऐतिहासिक अध्याय को उस भव्यता के साथ पर्दे पर ला रहे हैं।
अपनी ग्रैंड कहानी और इतिहास से जुड़ी फिल्मों के लिए मशहूर इन दोनों मेकर्स का साथ आना इस बात का इशारा है कि गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ पर किए गए हमलों और मंदिर की जीत की कहानी को बहुत ही गहराई से दिखाया जाएगा।
क्या आप जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर पर लगभग छह सदियों तक बार-बार हमले हुए? इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा हमला 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, उस वक्त मंदिर को लूटा गया, ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंचाया गया और वहां से बेहिसाब संपत्ति ले जाई गई थी।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के जनरल उलग खान ने मंदिर पर फिर से हमला किया था, और कहा जाता है कि वह मूर्ति को अपने साथ दिल्ली ले गया था। हमलों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। 1395 ईस्वी में जफर खान ने एक और हमला किया, और फिर 1451 ईस्वी में महमूद बेगड़ा ने भी मंदिर को नुकसान पहुंचाया।
इतना ही नहीं, कई ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, 1665 ईस्वी में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मिले आदेशों के बाद मंदिर को एक बार फिर तोड़ा गया। हर हमले ने गहरे जख्म दिए, लेकिन सोमनाथ हर बार फिर से उठ खड़ा हुआ उसे बार-बार बनाया गया, संवारा गया और आज भी वह करोड़ों की आस्था का केंद्र है।
'जय सोमनाथ' के जरिए भारतीय इतिहास का वो सबसे बड़ा हिस्सा सामने आ रहा है जिसे आज तक किसी ने पर्दे पर नहीं दिखाया। महमूद गजनी के हमलों की इस कहानी को अब संजय लीला भंसाली और केतन मेहता मिलकर बड़े पर्दे पर उतारने वाले हैं। इन दोनों का विजन ही इतना ग्रैंड है कि यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, कुर्बानी और कभी न हारने वाले जज्बे की मिसाल होगी।
इतिहास के इस बेहद इमोशनल हिस्से को चुनकर, मेकर्स एक ऐसी फिल्म लाने की तैयारी में हैं जो दिखाती है कि चाहे कितनी भी तबाही मचे, आखिर में जीत हमेशा आस्था और विश्वास की ही होती है।