संजय दत्त की सबसे बड़ी ताकत हैं मान्यता दत्त, मुश्किल दौर में ऐसे बनीं 'लेडी लक'
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही है। उनके जीवन के कई उतार-चढ़ाव में अगर कोई साये की तरह हमेशा साथ खड़ा रहा, तो वह हैं उनकी पत्नी मान्यता दत्त। 22 जुलाई को अपना जन्मदिन मना रहीं मान्यता आज बॉलीवुड की सबसे प्रभावशाली स्टार वाइफ्स में से एक मानी जाती हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज करोड़ों की संपत्ति और संजय दत्त प्रॉडक्शन की कमान संभालने वाली मान्यता ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कठिन दौर से की थी? बी-ग्रेड फिल्मों के संघर्ष से लेकर संजय दत्त के दिल की मालिकाना हक हासिल करने तक, आइए जानते हैं मान्यता दत्त के जीवन से जुड़े कुछ बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक पहलू।
दिलनवाज शेख से मान्यता बनने की कहानी
22 जुलाई 1978 को मुंबई के एक मुस्लिम परिवार में जन्मी मान्यता का असली नाम दिलनवाज़ शेख है। उनका बचपन का कुछ समय दुबई में भी बीता। बचपन से ही आंखों में बॉलीवुड एक्ट्रेस बनने का सपना सजाए दिलनवाज जब मुंबई लौटीं, तो उनके पास न कोई गॉडफादर था और न ही कोई बड़ा सहारा।
इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने शुरुआत में अपना नाम बदल कर 'सारा खान' रखा। हालांकि, मुख्यधारा की फिल्मों में बड़ा मौका न मिलने के कारण मजबूरी में उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों का रुख करना पड़ा। किस्मत ने करवट तब ली जब मशहूर निर्देशक प्रकाश झा की नजर उन पर पड़ी। प्रकाश झा ने उन्हें अपनी हिट फिल्म 'गंगाजल' में एक आइटम नंबर के लिए साइन किया और उन्हें एक नया नाम दिया— मान्यता।
संजय दत्त की पहली शादी एक्ट्रेस ऋचा शर्मा से हुई थी और दूसरी शादी मॉडल रिया पिल्लई से। रिया से तलाक के बाद संजय काफी अकेले पड़ चुके थे। इसी दौर में उनकी मुलाकात मान्यता से हुई। संजय और मान्यता की पहली मुलाकात की वजह बेहद अजीब थी।
दरअसल, मान्यता की एक सी-ग्रेड फिल्म 'लवर्स लाइक अस' के राइट्स संजय दत्त ने 20 लाख रुपये में खरीदे थे। इसी सिलसिले में जब दोनों की बातचीत शुरू हुई, तो मान्यता के सादगी भरे व्यवहार ने संजय दत्त का दिल जीत लिया।
ऐसे जीता संजू बाबा का दिल
जहां ग्लेमर की दुनिया में लोग संजय दत्त के स्टारडम से प्रभावित थे, वहीं मान्यता ने संजय के दिल तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही सादगी से तय किया। वे घंटों फोन पर बातें करते। मान्यता अक्सर संजय दत्त के लिए अपने हाथों से खाना बनाकर लाती थीं और उनके घर-परिवार का ख्याल रखने लगी थीं।
संजय दत्त ने कई इंटरव्यूज में इस बात का जिक्र किया है कि जब उनके जीवन में सब कुछ बिखरा हुआ था, तब मान्यता ने उन्हें एक घर और अपनों का अहसास दिया। मान्यता के इसी केयरिंग और समरपिक रवैये से प्रभावित होकर संजय दत्त ने उनसे शादी करने का मन बना लिया।
साल 2008 में संजय दत्त और मान्यता ने गोवा में एक निजी समारोह के दौरान शादी कर ली। इस शादी को लेकर मीडिया में काफी चर्चाएँ हुईं, जिसकी मुख्य वजह दोनों की उम्र का फासला था। शादी के वक्त मान्यता की उम्र 29 साल थीं। वहीं संजय दत्त की उम्र 50 साल थी।
लगभग 21 साल के इस बड़े अंतर के बावजूद, दोनों के प्यार और आपसी समझ के बीच उम्र कभी बाधा नहीं बनी। साल 2010 में मान्यता ने जुड़वा बच्चों— शाहरान और इकरा को जन्म दिया, जिसके बाद उनका परिवार पूरा हो गया।
हर बुरे दौर में बनीं संजय की ढाल
संजय दत्त की जिंदगी में आए कानूनी संकटों, टाडा मामले में जेल जाने के दिनों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ने के दौरान, मान्यता एक चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। उन्होंने न सिर्फ संजू बाबा का हौसला बनाए रखा, बल्कि दोनों बच्चों की परवरिश और घर की ज़िम्मेदारी भी अकेले संभाली।
संजय दत्त से शादी के बाद मान्यता ने एक्टिंग की दुनिया को पूरी तरह से अलविदा कह दिया। आज वह एक सफल बिजनेसवुमन हैं और 'संजय दत्त प्रॉडक्शन' की CEO के रूप में काम कर रही हैं। वे न सिर्फ अपने परिवार को संभालती हैं, बल्कि संजय दत्त के बिजनेस प्रोजेक्ट्स और फिल्मों के मैनेजमेंट को भी कुशलता से देखती हैं।

