काजोल का नाम पिता रखना चाहते थे 'मर्सिडीज', 16 साल की उम्र में छोड़ दिया था स्कूल
बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल 5 अगस्त को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। 90 के दशक से लेकर आज तक, काजोल ने अपनी कातिलाना मुस्कान, भूरी आँखों और स्वाभाविक अभिनय से दर्शकों के दिलों पर एकछत्र राज किया है। तनुजा और शोमू मुखर्जी जैसी दिग्गजों की बेटी होने के बावजूद काजोल ने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर काजोल के पिता की चलती, तो आज हम उन्हें 'काजोल' नहीं बल्कि एक लग्जरी कार के नाम से जानते? आइए, काजोल के जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे ही अनसुने और मजेदार किस्से।
जब पिता रखना चाहते थे बेटी का नाम 'मर्सिडीज'
काजोल के नाम से जुड़ा यह किस्सा बेहद मजेदार है। एक इंटरव्यू के दौरान खुद काजोल ने इस बात का खुलासा किया था कि उनके पिता और जाने-माने फिल्म निर्माता शोमू मुखर्जी उनका नाम 'मर्सिडीज' रखना चाहते थे।
दरअसल, शोमू मुखर्जी को 'मर्सिडीज' नाम बहुत पसंद था। उनका तर्क था कि जब मर्सिडीज कार कंपनी के मालिक अपनी बेटी के नाम ('मर्सिडीज') पर इतनी बड़ी ब्रांड खड़ी कर सकते हैं, तो वह अपनी बेटी का नाम 'मर्सिडीज' क्यों नहीं रख सकते? हालांकि, उनकी मां और दिग्गज अभिनेत्री तनुजा को यह आइडिया पसंद नहीं आया और आखिरकार उनका नाम 'काजोल' रखा गया।
बचपन में मां तनुजा से बर्तन और बैडमिंटन रैकेट से खाई मार
फिल्मी दुनिया के एक बड़े और रसूखदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद काजोल का बचपन किसी आम भारतीय बच्चे से अलग नहीं था। उनकी मां तनुजा बच्चों की परवरिश को लेकर बहुत सख्त थीं और उनका मानना था कि बच्चों को कभी भी बिगाड़ना नहीं चाहिए।
काजोल ने खुद बताया था कि बचपन में शरारत करने पर उनकी मां उनकी जमकर क्लास लेती थीं। काजोल को अपनी मां से बैडमिंटन रैकेट, बर्तनों और चप्पलों से मार भी पड़ी है। तनुजा के इसी अनुशासन का नतीजा है कि आज भी काजोल बेहद व्यावहारिक और जमीन से जुड़ी हुई इंसान हैं।
16 की उम्र में छोड़ा स्कूल, फिल्म 'बेखुदी' से रखा बॉलीवुड में कदम
काजोल की पढ़ाई-लिखाई पंचगनी के 'सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल' में हुई थी। उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। महज 16 साल की उम्र में उन्हें फिल्म 'बेखुदी' (1992) में काम करने का मौका मिला।
फिल्म की शूटिंग के दौरान ही काजोल को समझ आ गया था कि उनका असली जुनून अभिनय ही है। अपने एक्टिंग करियर पर पूरा ध्यान देने के लिए उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ दी। भले ही उनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ा कमाल न दिखा सकी, लेकिन बॉलीवुड को एक चमकता हुआ सितारा मिल चुका था।
'बेखुदी' के बाद काजोल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्म 'बाजीगर' से उनके करियर को नई ऊंचाइयां मिलीं। इसके बाद उन्होंने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'करन अर्जुन', 'कुछ कुछ होता है', 'कभी खुशी कभी गम', 'गुप्त', 'दुश्मन', 'फ़ना' और 'तन्हाजी' जैसी एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं।
अपनी बेबाकी, चुलबुलेपन और संजीदा अभिनय के दम पर काजोल आज भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। वह ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर भी अपने अभिनय का परचम लहरा रही हैं।

