'सतलुज' के लिए दिलजीत दोसांझ ने ली सिर्फ 1 रुपये फीस, डायरेक्टर हनी त्रेहान ने बताई वजह
पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी फिल्म 'सतलुज' को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। यह फिल्म रिलीज के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई। पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के साथ इसका लंबा विवाद चला और फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर रिलीज होने के महज 48 घंटों के भीतर इसे चुपचाप हटा दिया गया।
'सतलुज' को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक ऐसी बात सामने आई है जिसने फैंस का दिल जीत लिया है। फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि इस ऐतिहासिक और संवेदनशील किरदार को निभाने के लिए दिलजीत दोसांझ ने सिर्फ 1 रुपये फीस ली थी।
डायरेक्टर हनी त्रेहान ने कहा कि वह इस फिल्म में किसी मुख्यधारा के बॉलीवुड अभिनेता को नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने कहा, अगर दिलजीत इस फिल्म में नहीं होते, तो शायद यह प्रोजेक्ट कभी हकीकत नहीं बन पाता। मुझे एक ऐसा अभिनेता चाहिए था जो पंजाब की मिट्टी और उस दौर के दर्द को गहराई से समझता हो।
उन्होंने कहा, मैं किसी सरदार अभिनेता को ही कास्ट करना चाहता था, क्योंकि अगर मैं किसी बॉलीवुड एक्टर को लेता, तो लोगों का ध्यान कहानी से हटकर इस बात पर चला जाता कि 'यह अभिनेता सरदार का रोल कर रहा है।' यह जसवंत सिंह खालड़ा साहब के संघर्ष और उन लोगों के दर्द के साथ नाइंसाफी होती, जिनकी कहानी यह फिल्म बयां करती है।
स्क्रिप्ट देखते ही दिलजीत ने जोड़ लिए थे हाथ
हनी त्रेहान ने साल 2021 का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वह पहली बार दिलजीत से मिले, तो वह सिर्फ 30 मिनट की मुलाकात थी। जैसे ही उन्होंने दिलजीत को जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर दिखाई और रिसर्च डॉक्यूमेंट्स सौंपे, दिलजीत हैरान रह गए।
त्रेहान ने याद करते हुए बताया, दिलजीत अपनी कुर्सी से खड़े हो गए, स्क्रिप्ट को अपने माथे से लगाया और कहा— 'वाहेगुरु'। उन्होंने कहा कि खालड़ा साहब जैसे महान इंसान का किरदार निभाने के लिए मैं पैसे कैसे ले सकता हूं? यह बेहद शर्मनाक होगा। हालांकि, जब डायरेक्टर ने कागजी कार्रवाई और कॉन्ट्रैक्ट की औपचारिकता के लिए जोर दिया, तो दिलजीत ने कहा कि अगर देना ही है, तो मुझे सिर्फ 1 रुपये का भुगतान कर दीजिए।
सेट पर दिखाते थे गजब का समर्पण
फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलजीत के सपोर्ट की तारीफ करते हुए डायरेक्टर ने बताया कि कई बार शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ जाता था। उन्होंने कहा, कई ऐसे दिन थे जब दिलजीत सुबह 6 बजे सेट पर आ जाते थे, लेकिन काम की व्यस्तता या दिक्कतों के कारण उनका पहला शॉट शाम 4 बजे तक भी नहीं हो पाता था। मैं उनसे बार-बार माफी मांगता था, लेकिन वह हर बार मुस्कुराकर कहते थे— 'पाजी, कोई बात नहीं। आप जो भी कर रहे हैं, फिल्म की भलाई के लिए कर रहे हैं। मैं यहां फिल्म को सपोर्ट करने आया हूं।'
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। 1990 के दशक के मध्य में, एक बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने खालड़ा ने पंजाब में 1984 से 1994 के बीच मारे गए और लावारिस बताकर जलाए गए लगभग 25,000 लोगों के शवों के सच को उजागर किया था। उनकी इस बहादुरी और जांच के बाद, 1995 में पुलिस हिरासत के दौरान उनका अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई, जिसकी पुष्टि बाद में अदालती फैसले में भी हुई।

