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Dilip Kumar Death Anniversary: पेशावर का यूसुफ खान कैसे बना बॉलीवुड का 'ट्रेजेडी किंग'?
7 जुलाई भारतीय सिनेमा के इतिहास का वो भावुक दिन है, जब हिंदी फिल्मों के आसमान का सबसे चमकदार सितारा हमेशा के लिए कहीं ओझल हो गया था। अभिनय के 'संस्थान' कहे जाने वाले दिलीप कुमार आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी की विरासत आज भी नए कलाकारों के लिए एक पाठशाला की तरह है।
आइए दिलीप कुमार की पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं कि कैसे विभाजन से पहले पेशावर की गलियों में रहने वाला एक साधारण सा लड़का 'मोहम्मद यूसुफ खान' भारतीय सिनेमा का पहला 'खान सुपरस्टार' बन गया।
'ज्वार भाटा' से शुरू हुआ 5 दशकों का ऐतिहासिक सफर
दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले और अपनी पहचान छुपाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदला और साल 1944 में आई फिल्म 'ज्वार भाटा' से बतौर अभिनेता कदम रखा। हालांकि, उन्हें असली पहचान साल 1947 में आई फिल्म 'जुगनू' से मिली।
इसके बाद उन्होंने अगले पांच दशकों तक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर राज किया। उन्होंने गंभीर और भावुक किरदारों को पर्दे पर इतनी शिद्दत से जिया कि दुनिया उन्हें 'ट्रेजेडी किंग' के नाम से पुकारने लगी। 'मुगल-ए-आजम', 'देवदास', 'नया दौर', 'गंगा जमुना' और 'राम और श्याम' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें सिनेमा का 'कोहिनूर' बना दिया।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है नाम
दिलीप कुमार साहब की महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अभिनेता के तौर पर दर्ज किया गया। वे बॉलीवुड के पहले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने अभिनय की एक नई विधा 'मेथड एक्टिंग' को देश में स्थापित किया।
जब 'ट्रेजेडी किंग' की वजह से डिप्रेशन में आ गए थे दिलीप कुमार
पर्दे पर लगातार दुख, दर्द और जुदाई के गम को जीने के कारण दिलीप कुमार असल जिंदगी में डिप्रेशन का शिकार होने लगे थे। मनोवैज्ञानिकों ने उन्हें सलाह दी कि अगर वे अपनी मानसिक सेहत को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें गंभीर फिल्मों से दूरी बनानी होगी। इसके बाद दिलीप साहब ने अपनी शैली बदली और 'आजाद', 'कोहिनूर' और 'राम और श्याम' जैसी कॉमेडी व ड्रामा फिल्मों में काम कर दर्शकों को अपनी वर्सटैलिटी से चौंका दिया।
'किला' के साथ सिनेमाई युग का अंत
साल 1998 में आई फिल्म 'किला' दिलीप कुमार के करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद वे गिरते स्वास्थ्य के कारण बड़े पर्दे से दूर हो गए। 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली।
