Dhurandhar 2: 11 दिन में तैयार किए 14 गाने, आदित्य धर ने शाश्वत सचदेव की 'जादुई' रफ्तार देख दुनिया को बताया सच
आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर 2' इन दिनों न केवल बॉक्स ऑफिस पर अपनी जबरदस्त कमाई और कलाकारों के दमदार अभिनय के लिए चर्चा में है, बल्कि इसका संगीत भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। फिल्म के गानों ने पिछले कई महीनों से म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। पुराने हिंदी सुपरहिट गानों, क्लासिक कव्वालियों और इंडिपेंडेंट गानों का जो अनोखा मिश्रण इस फिल्म में पेश किया गया है, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। फिल्म को सिनेमाघरों में 19 दिन पूरे होने के मौके पर निर्देशक आदित्य धर ने अपने संगीतकार शाश्वत सचदेव की 'दुर्लभ' प्रतिभा की जमकर तारीफ की और सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया।
11 दिनों में रचे 14 गाने: एक अनोखा रिकॉर्ड
आदित्य धर ने खुलासा किया कि शाश्वत सचदेव ने 'धुरंधर' के पहले भाग के लिए मात्र 9 दिनों में 9 गाने तैयार किए थे और पूरी फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) सिर्फ 6 दिनों में खत्म कर दिया था। लेकिन असली चमत्कार तो 'धुरंधर 2' के दौरान हुआ, जब शाश्वत ने अपनी ही रफ्तार को पीछे छोड़ते हुए केवल 11 दिनों के भीतर 14 गानों की रचना कर डाली और महज 3 दिनों में बैकग्राउंड म्यूजिक का काम भी पूरा कर लिया। आदित्य ने इस उपलब्धि को दुनिया की किसी भी फिल्म के लिए एक 'अत्यंत दुर्लभ' घटना बताया है। उन्होंने कहा कि जिस पैमाने और भावनात्मक गहराई के साथ ये गाने बनाए गए हैं, वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है।
जब स्टूडियो बन गया था आदित्य धर का घर
इस संगीत को तैयार करने के पीछे की मेहनत का जिक्र करते हुए आदित्य ने बताया कि लगभग 15 दिनों तक उनका घर किसी स्टूडियो की तरह काम कर रहा था। घर के हर कमरे में संगीत की गूंज थी। लिविंग रूम में धुनें बन रही थीं, बेडरूम में रिकॉर्डिंग चल रही थी और बालकनी में गानों के बोल लिखे जा रहे थे। गायक और संगीतकारों का आना-जाना चौबीसों घंटे लगा रहता था। आदित्य ने बताया कि उन्होंने और शाश्वत ने लगातार 21-22 घंटों तक काम किया, जहाँ दिन और रात का फर्क मिट गया था। इस पागलपन और जुनून का ही नतीजा है कि फिल्म के दोनों एल्बम रिलीज होने के 3 महीने के भीतर ही ग्लोबल चार्ट्स पर टॉप पर पहुंच गए।
चुनौतियों के बीच शाश्वत का अडिग संकल्प
आदित्य धर ने शाश्वत सचदेव को अपने छोटे भाई की तरह बताया, जिनके साथ उन्होंने सृजनात्मकता के सबसे कठिन दिन साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में शाश्वत ही थे, जो सबको साथ लेकर चल रहे थे। कई बार शाश्वत की तबीयत खराब हुई, वे नींद की कमी से जूझ रहे थे और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी थीं, लेकिन उन्होंने कभी अपने काम से समझौता नहीं किया। उनकी इसी हिम्मत और लचीलेपन ने 'धुरंधर 2' के संगीत को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया है। 'आरी आरी' जैसे पंजाबी लोकगीत और नुसरत फतेह अली खान की 'दिल पे जख्म खाते हैं' जैसी क्लासिक कव्वालियों ने फिल्म के नैरेटिव को बेहद मजबूत बना दिया है।