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चंद्रचूड़ सिंह की पुश्तैनी हवेली पर कलह, एक्टर ने चाची पर लगाया कब्जा करने का आरोप, मांगा न्याय
'माचिस' और 'दाग द फायर' जैसी सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों के दिलों में पहचान बनाने वाले बॉलीवुड अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित उनकी 19वीं सदी की पुश्तैनी हवेली 'कल्याण भवन' को लेकर पारिवारिक विवाद गहरा गया है।
इस मामले में चंद्रचूड़ सिंह एक बार फिर अलीगढ़ के कलेक्ट्रेट और एसएसपी ऑफिस पहुंचे, जहां उन्होंने अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की। छह महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब बॉलीवुड अभिनेता को अपनी ही जागीर को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
यह पूरा मामला पिछले साल दिसंबर 2025 से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें अब नए कानूनी मोड़ सामने आ रहे हैं। जलालपुर स्थित अपने पैतृक आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्रचूड़ सिंह ने अपनी चाची गायत्री देवी पर सीधे और बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
एक्टर का कहना है कि उनकी चाची और उनके बेटे ने मिलकर एक फर्जी वसीयत तैयार की है, जिसके जरिए वे इस बहुमूल्य ऐतिहासिक हेरिटेज हवेली और उससे जुड़ी कीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने की फिराक में हैं।
चंद्रचूड़ सिंह ने अंदेशा जताया कि उनकी पैतृक संपत्ति को नष्ट करने की बड़ी साजिश रची जा रही है, जिसमें कुछ स्थानीय राजनेताओं का भी संरक्षण मिला हुआ है। अभिनेता ने भावुक होते हुए कहा, वे लोग इस ऐतिहासिक धरोहर पर अवैध रूप से कब्जा जमाकर बैठे हैं और अब हमें हमारी ही पुश्तैनी हवेली के अंदर कदम तक नहीं रखने दिया जा रहा है।
क्या है 'कल्याण भवन' हवेली का इतिहास?
'कल्याण भवन' कोई साधारण इमारत नहीं, बल्कि इतिहास का एक नायाब पन्ना है। छह एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली इस आलीशान हवेली का निर्माण साल 1885 में कराया गया था। इतिहास के मुताबिक, अतरौली (अवागढ़) के राजा ने ठाकुर कल्याण सिंह को सम्मान स्वरूप तीन गांव उपहार में दिए थे। ठाकुर कल्याण सिंह, अलीगढ़ के पूर्व विधायक और चंद्रचूड़ सिंह के पिता स्वर्गीय कैप्टन बलदेव सिंह के परदादा थे।
यह एस्टेट, जो कभी जलालपुर गांव की पहचान हुआ करता था, आज विकास के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक आ चुका है और अलीगढ़ शहर की सीमा के भीतर एक बेहद पॉश और घनी आबादी वाला इलाका बन चुका है। प्राइम लोकेशन होने की वजह से इस करोड़ों की संपत्ति की कीमत बाजार में तेजी से बढ़ी है, जिसने इस पारिवारिक कलह की आग में घी का काम किया।
चाची गायत्री देवी ने दावों को दी चुनौती
दूसरी तरफ, गुजरात के एक प्रतिष्ठित शाही परिवार से ताल्लुक रखने वालीं चंद्रचूड़ सिंह की चाची गायत्री देवी ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए जिला प्रशासन से संपर्क साधा है। दोनों ही पक्ष अब आमने-सामने हैं। इस बीच, चंद्रचूड़ सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे सिर्फ अपनी धरोहर को बचाने और न्याय पाने के लिए लड़ रहे हैं।
