करण जौहर की रोस्टिंग करना कैरी मिनाटी को पड़ा महंगा, कोर्ट ने सुनाया यह फैसला
इंटरनेट की दुनिया में 'रोस्टिंग' के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजय नागर उर्फ कैरी मिनाटी कानूनी पंचड़े में फंस गए हैं। बॉलीवुड फिल्म निर्माता और धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस पूरे विवाद की शुरुआत कैरी मिनाटी के एक वीडियो से हुई, जिसमें उन्होंने करण जौहर और उनके मशहूर सेलिब्रिटी टॉक शो 'कॉफी विद करण' का मजाक उड़ाया था।
कैरी मिनाटी अपनी विशिष्ट शैली में मशहूर हस्तियों को रोस्ट करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग था। करण जौहर की टीम का आरोप है कि इस वीडियो में सिर्फ मजाक ही नहीं था, बल्कि फिल्ममेकर के खिलाफ बेहद 'अभद्र', 'आपत्तिजनक' और 'मानहानिकारक' भाषा का प्रयोग किया गया था।
करण जौहर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई सेशन कोर्ट ने कैरी मिनाटी, टैलेंट मैनेजर दीपक चार और अन्य लोगों को करण जौहर के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया पर पब्लिश या सर्कुलेट करने से रोक यिदा है।
कोर्ट में दी गई दलीलों के अनुसार, वीडियो की सामग्री ऐसी थी जिससे करण जौहर की सार्वजनिक छवि को गहरा धक्का पहुँचा और उनके दशकों पुराने करियर की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए गए। उनके वकीलों का मुख्य तर्क यह था कि किसी भी व्यक्ति को अपनी 'पर्सनैलिटी राइट्स' यानी व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करने का पूरा हक है।
अदालत में यह दलील दी गई कि कैरी मिनाटी ने करण जौहर के नाम, उनकी आवाज और उनके व्यवहार के तौर-तरीकों का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया और इस प्रक्रिया में उनकी छवि को धूमिल किया। डिजिटल युग में 'रोस्टिंग' के नाम पर किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
कैरी मिनाटी को बड़ा झटका
प्रधान सत्र न्यायाधीश पी.जी. भोसले ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह माना कि कैरी मिनाटी के वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा मर्यादा से परे थी। अदालत ने कैरी मिनाटी और उनके मैनेजर दीपक चार को करण जौहर के खिलाफ भविष्य में किसी भी प्रकार की मानहानिकारक सामग्री बनाने या प्रसारित करने से रोक दिया है।
कोर्ट ने मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया कि वे उन सभी यूआरएल को ब्लॉक करें या हटाएं जिनमें विवादित सामग्री मौजूद है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसे आदेशों का उल्लंघन होता है, तो आरोपी को भारी हर्जाना देना पड़ सकता है।
कैरी मिनाटी के वकील ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अजय नागर ने पहले ही विवादित वीडियो को अपने चैनल से हटा दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि रोस्टिंग एक प्रकार की कला और अभिव्यक्ति है, जिसे दर्शकों द्वारा व्यापक रूप से पसंद किया जाता है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एक बार जब सामग्री वायरल हो जाती है, तो उसे हटाने के बाद भी क्षति बनी रहती है।