पोर्न फिल्म और इरॉटिक फिल्म में क्या है अंतर?

Last Updated: बुधवार, 28 जुलाई 2021 (19:29 IST)
राज कुन्द्रा को पुलिस ने पोर्नोग्राफी के केस में गिरफ्तार कर लिया है। अरबों रुपये की संपत्ति के मालिक राज के वकील उन्हें इस मामले में बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। बचाव में यह दलील दी जा रही है कि राज नहीं बल्कि इरॉटिक फिल्में बनाते थे। इससे पोर्न, एडल्ट, सॉफ्ट पोर्न और इरोटिक फिल्मों की कैटेगरी को लेकर बहस छिड़ गई है। क्या अश्लील है और क्या नहीं इस पर भी लंबे समय से बहस छिड़ती आई है। कहने वाले कहते हैं कि यह तो देखने वाले की नजर ही बता सकती है। एक दौर था जब राज कपूर की बोल्ड सीन वाली फिल्मों को सेंसर पास कर देता था और बीआर इशारा की फिल्मों को बोल्ड सीन के कारण सेंसर रोक देता था। इशारा साहब इससे बेहद नाराज हुए और उन्होंने कहा कि राज कपूर दिखाए तो 'कला' और हम दिखाए तो 'अश्लीलता'। अब यह बहस 'पोर्न' बनाम 'इरॉटिक' पर टिक गई है।

80 के दशक में सी-ग्रेड फिल्मों की बाढ़ आ गई थी। इन फिल्मों में बोल्ड सीन होते थे। कुछ फिल्में विदेशी होती थी और कुछ देशी। सेंसर जिन दृश्यों को काट देता था उसे सिनेमाघर वाले जोड़कर दिखाते थे। कुछ विदेशी फिल्मों में बोल्ड सीन साउथ की फिल्मों के होते थे और दर्शक को इस बात से कोई शिकायत नहीं होती थी क्योंकि उन्हें सिर्फ 'बोल्ड' दृश्यों से मतलब होता था। इन फिल्मों ने कई बड़े बजट की फिल्मों से ज्यादा व्यवसाय किया और वीसीआर से लड़ने के लिए फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इन फिल्मों को हथियार बनाया। ये फिल्में देखने के लिए दर्शकों को सिनेमा का टिकट ही खरीदना पड़ता था। घर पर इस तरह की फिल्में देखना हर किसी के लिए संभव नहीं था। लेकिन जैसे ही इंटरनेट ने अपने पैर पसारे, सी-ग्रेड फिल्में सिनेमाघरों से आउट हो गई। मोबाइल के आते ही पोर्न फिल्में सहज उपलब्ध हो गईं। मोबाइल पर क्लिप्स उपलब्ध होने लगी। वेबसाइट पर ये फिल्में उपलब्ध होने लगी। अरबों रुपयों में इन फिल्मों का व्यापार होता है। एक दर्शक वर्ग पोर्न और इरॉटिक फिल्मों का खूब आनंद उठाता है।

राज के वकील ने कोर्ट में कहा है कि राज की फिल्मों को एडल्ट नहीं बल्कि इरॉटिक कहना सही होगा। इसे पोर्नोग्राफी की श्रेणी में रखना सही बात नहीं है। इन फिल्मों में दो लोगों के बीच संभोग नहीं दिखाया गया है। इरॉटिक फिल्में डिजीटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं और इन्हें पोर्न कहना गलत होगा।

क्या होती हैं पोर्न फिल्में?
पोर्न फिल्मों में कहानी नहीं के बराबर होती है। इन फिल्मों का उद्देश्य सिर्फ 'संभोग' दिखाना होता है। पोर्नोग्राफी में महिलाओं को यौन वस्तुओं की तरह प्रस्तुत किया जाता है। पोर्न फिल्में किसी तरह का प्रभाव नहीं छोड़ती। इसमें कला नहीं होती। यह मात्र पैसा कमाने का जरिया है। स्त्री और पुरुष की शारीरिक खूबसूरती के बजाय इसका उद्देश्य सिर्फ वासना को भड़काना होता है। इसमें न्यूडिटी ही नहीं होती बल्कि इंटरकोर्स को विभिन्न तरीकों से दिखाया जाता है। पोर्न फिल्मों का मकड़जाल हर देश में फैला हुआ है। इंटरनेट पर ये फिल्में आसानी से उपलब्ध है और इनकी करोड़ों क्लिपिंग्स व्हाट्स एप के जरिये शेयर की जाती है। इनमें कुछ क्लिप्स पर्सनल होती हैं जो लीक हो जाती हैं।

क्या होते हैं इरॉटिक फिल्में?
वेबसीरिज के कारण माहौल खुला हो गया है। आजकल भारतीय वेबसीरिज में भी स्त्री-पुरुष के 'अंतरंग' क्षणों को दिखाया जाता है। फिल्म निर्देशक इन्हें सेंसुअस तरीके से दिखाते हैं। स्क्रीन पर इस तरह का आभास पैदा किया जाता है कि एक्टर्स इंटरकोर्स कर रहे हैं जबकि हकीकत में ऐसा नहीं होता है। इन्हें इरॉटिक सीन कहा जाता है। ये एक्शन, रोमांटिक, कॉमेडी फिल्मों या वेबसीरिज में होते हैं। जब कहानी एडल्ट किस्म की हो जिसमें सेक्स अहम हो तो इरॉटिक फिल्मों का निर्माण किया जाता है। इनका उद्देश्य कामुक एक्साइटमेंट को बढ़ाना होता है। इरॉटिक केवल फिल्में ही नहीं बल्कि पुस्तक या मूर्ति भी हो सकती है। यह एक आर्ट है। इसमें सौंदर्य बोध भी रहता है। शारीरिक अंतरंगता का सम्मान रहता है। अभिनय, निर्देशन, सिनेमाटोग्राफी या अन्य तकनीकी पहलुओं की तारीफ होती है।

बीच का रास्ता
इन दिनों भारत में 'एडल्ट' फिल्म की बाढ़ आई है। ये फिल्में 20 से 60 मिनट की होती हैं। इनमें पोर्न फिल्मों की तरह इंटरकोर्स के दृश्य नहीं होते। लेकिन इनकी कहानियां बेहद घटिया किस्म की होती हैं। कम उम्र का लड़का अधिक उम्र की महिला, टीचर-स्टूडेंट के बीच का रिश्ता, मामी-भांजा, चाची-भतीजा, देवर-भाभी जैसे रिश्तों की आड़ में काम-वासना भड़काने वाले सीन होते हैं। ये सीन सिर्फ कामोत्तेजक ही नहीं होते हैं बल्कि दर्शकों की मानसिकता को भी दूषित करते हैं। खासतौर पर 10 से 15 साल के बच्चे ये फिल्में देख इन रिश्तों को 'दूषित' समझ लेते हैं।

राज कुन्द्रा किस तरह की फिल्में बनाते हैं इसका फैसला तो अदालत करेगी, लेकिन जिस तरह से उनके वकील ने जो राह चुनी है उससे साफ है कि वे पोर्न फिल्में नहीं बनाते थे। इससे उनके बचने के अवसर ज्यादा हैं बशर्ते कोई महिला उनके खिलाफ खड़ी न हो जाए। कुंद्रा पर आईपीसी की धारा 354 (सी), 292, 420 और आईटी अधिनियम और महिलाओं का अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम की धारा 67, 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानून जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि कुंद्रा आसानी से इससे बच निकलेंगे।



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