गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
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एक फिल्ममेकर, तीन सुपरहिट्स और अनगिनत बहसें: आदित्य धर का उभरता सिनेमाई साम्राज्य

Aditya Dhar
हिंदी सिनेमा में समय-समय पर ऐसे फिल्ममेकर आते रहे हैं जिन्होंने अपने काम से धमाल मचा दिया। उन्होंने ऐसी फिल्में बनाईं जो बरसों-बरस तक याद की जाती रही। रमेश सिप्पी 'शोले' बनाकर अमर हो गए। फिर सूरज बड़जात्या ने मैंने प्यार किया बना कर उजाला फैलाया। कुछ वर्षों में दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे से आदित्य चोपड़ा का उदय हुआ। इन फिल्मकारों ने कमर्शियल फॉर्मेट में रह कर अनोखी फिल्में बनाईं जो पसंद भी की गई और बॉक्स ऑफिस पर भी पैसों की बरसात कर दी। लंबे समय बाद अब आदित्य धर का नाम इस लिस्ट को आगे बढ़ाते नजर आया। 
 
हिंदी सिनेमा के ये नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ फिल्में नहीं बनाते, बल्कि एक विचारधारा और शैली को जन्म देते हैं। आदित्य धर भी उन्हीं फिल्मकारों में से एक हैं। उनकी फिल्मों में न सिर्फ कहानी होती है, बल्कि एक भावनात्मक गहराई और तकनीकी सटीकता भी होती है, जो दर्शकों को लंबे समय तक प्रभावित करती है।
 
‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से शुरू हुई उनकी यात्रा आज ‘धुरंधर’ जैसी मेगा हिट तक पहुंच चुकी है, जहां बॉक्स ऑफिस के आंकड़े भी उनकी कहानी कहने की ताकत के सामने झुकते नजर आते हैं।
 

दिल्ली से मुंबई: एक लंबा संघर्ष और सृजन का रास्ता

12 मार्च 1983 को दिल्ली में जन्मे आदित्य धर एक कश्मीरी पंडित परिवार से आते हैं। उनकी मां सुनीता धर दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन रह चुकी हैं, जिन्होंने उनके बौद्धिक विकास को गहराई दी। लेकिन उनका असली झुकाव कला और अभिव्यक्ति की ओर था।
 
करीब दो दशकों तक म्यूजिक थिएटर में बिताया गया समय उनके भीतर के कहानीकार को गढ़ता रहा। 2006 में जब उन्होंने मुंबई का रुख किया, तब यह सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक सपने की शुरुआत थी।
 
शुरुआत में उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया और धीरे-धीरे गीत लेखन और डायलॉग राइटिंग में भी हाथ आजमाया। कबीर खान की फिल्म ‘काबुल एक्सप्रेस’ में उनके लिखे गीत और बाद में प्रियदर्शन की फिल्मों में डायलॉग्स ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलानी शुरू कर दी।

Aditya Dhar Uri to Dhurandhar

‘उरी’: जहां से बदली कहानी

2019 में आई Uri: The Surgical Strike आदित्य धर के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। विक्की कौशल, यामी गौतम और परेश रावल अभिनीत इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई।
 
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी में छिपी ताकत थी। नाटकीयता से दूर, लेकिन भावनात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली। “How’s the Josh?” जैसा संवाद सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गया।
 
इस फिल्म के लिए आदित्य धर को नेशनल अवॉर्ड और बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जिसने उन्हें नई पीढ़ी के सबसे भरोसेमंद फिल्मकारों में शामिल कर दिया।
 

‘धुरंधर’: सफलता का नया शिखर

2025 में रिलीज हुई धुरंधर ने आदित्य धर को बॉक्स ऑफिस के शीर्ष पर पहुंचा दिया। रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर. माधवन और संजय दत्त जैसे दमदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने 1340 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया।
 
यह फिल्म न केवल भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी, बल्कि पोस्ट-कोविड दौर में बॉलीवुड की सबसे बड़ी सफलता के रूप में उभरी। इसकी सफलता ने यह साबित किया कि आदित्य धर सिर्फ एक अच्छे निर्देशक नहीं, बल्कि बड़े कैनवस के मास्टर हैं।
 

सिनेमा या प्रोपेगेंडा? बहस जारी है

आदित्य धर की फिल्मों को लेकर एक दिलचस्प बहस हमेशा चलती रही है। क्या उनकी फिल्में देशभक्ति का जश्न हैं या एक विशेष विचारधारा का प्रचार?
 
‘उरी’ और ‘धुरंधर’ दोनों को कुछ आलोचकों ने प्रोपेगेंडा बताया, लेकिन खुद धर इस विचार से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि दर्शक समझदार हैं और वे वास्तविक कहानी और प्रचार के बीच फर्क कर सकते हैं।
 
उनकी फिल्में एक संतुलित देशभक्ति दिखाती हैं, जहां भावनाएं हैं, लेकिन अतिशयोक्ति नहीं।
 

निजी जीवन और नई जिम्मेदारियां

व्यक्तिगत जीवन में आदित्य धर ने 2021 में यामी गौतम से विवाह किया। 2024 में उनके बेटे वेदविद का जन्म हुआ।
 
अपने भाई लोकेश धर के साथ मिलकर उन्होंने B62 स्टूडियोज की स्थापना की, जिसके तहत ‘आर्टिकल 370’ और ‘बारामुल्ला’ जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ। इससे साफ है कि वे सिर्फ निर्देशक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी निर्माता भी बन चुके हैं।
 
आदित्य धर का सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं है, यह एक अनुभव है। जहां तकनीक, भावना और विचार एक साथ चलते हैं।
 
उनकी यात्रा यह बताती है कि अगर कहानी में सच्चाई हो और प्रस्तुति में ईमानदारी, तो दर्शक उसे सिर-आंखों पर बिठाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने सिनेमाई ब्रह्मांड को किस दिशा में ले जाते हैं।
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