मर्लिन मुनरो की कहानी, उसी की जुबानी

रवींद्र व्यास|
जिंदगी में ऐसे पल आते हैं जब आपको लगता है कि आप किसी के साथ हैं और यही काफी है। मैं उन्हें छूना नहीं चाहती, यहाँ तक कि बात तक करना भी। दोनों के बीच एक अहसास बहता रहता है। और तब आप कतई अकेले नहीं होते।
मैं एक औरत के रूप में नाकामयाब हूँ। मेरा आदमी मुझसे बहुत ज्यादा अपेक्षाएँ रखता है। यह इस वजह से है क्योंकि उन्होंने अपने लिए मेरी एक छवि बना ली है और मैंने खुद को एक सेक्स सिम्बल बना लिया है। आदमी बहुत अपेक्षा रखता है, मैं इस पर अपने को जिंदा नहीं रख सकती। कुछ लोग हमेशा आपके प्रति कठोर होंगे। यदि मैं कहूँ कि मैं बतौर एक्ट्रैस विकसित होना चाहती हूँ तो वे मेरे फिगर को देखते हैं। यदि मैं कहूँ कि मैं अपने क्राफ्ट को विकसित करना चाहती हूँ तो वे हँसने लगते हैं। मुझे लगता है वे यह अपेक्षा नहीं रखते हैं कि मैं अपने काम के प्रति संजीदा रहूँ। यदि आप चाहते हैं कि कोई लड़की खुश रहे तो उसे वह सब करने दें जो वह चाहती है।

एक बेहतरीन अदाकारा होने का मुझे कोई वहम नहीं है। मैं जानती हूँ कि मैं कितनी तीसरे दर्जे की अदाकारा हूँ। मैं सचमुच महसूस करती हूँ कि मुझमें टैलेंट नहीं है। यह वैसा ही है जैसे मैं अंदर के सस्ते कपड़े पहनती हूँ, लेकिन मेरे ईश्वर बता मैं कैसे सीखना, बदलना औऱ परिष्कृत होना सीखूँ। एक एक्टर को बहुत संवेदनशील वाद्य होना चाहिए। इसाक स्टर्न अपनी वॉयलिन का बहुत ध्यान रखते थे।
यह बहुत डरावना है कि मैं जिन तमाम लोगों को नहीं जानती वे मुझे लेकर कितने भावुक होते हैं। मेरा मतलब है कि यदि वे आपको जाने बगैर बहुत प्यार करते हैं तो यह भी तो हो सकता है कि वे ठीक इसी तरह आपसे नफरत भी कर सकते हैं।

गोएथे ने कहा था कि टैलेंट निजी कोनों में फलता-फूलता है। आप जानते हैं? यह सचमुच में सच है। एक एक्टर के लिए हमेशा अकेलेपन की जरूरत है और अकसर लोग यह नहीं सोचते। यह आपके लिए एक निश्चित रहस्य होता है कि जब आप एक्टिंग कर रहे होते हैं तब उन पलों में पूरी दुनिया आप में होती है। मैं जब अकेली होती हूँ, मैं अपने को जमा करती हूँ। करियर लोगों के बीच पैदा होता है, प्रतिभा अकेले में।
कृपाकर मेरी हँसी न उड़ाएँ। मैं यकीन करती हूँ कि मैं एक अभिनेत्री बनना चाहती हूँ, अपनी इंटीग्रिटी के साथ एक अभिनेत्री। मैं सचमुच एक अदाकारा बनना चाहती हूँ, एक कामोत्तेजक जीव नहीं। मैंने अपना नाम मर्लिन कभी पसंद नहीं किया। मैं हमेशा चाहती रही कि मुझे जीन मुनरो के नाम से पुकारा जाए, लेकिन मुझे अंदाजा है कि इसके लिए अब कितनी देर हो चुकी है।
मैं यह कभी समझ नहीं पाती कि लोग एक-दूसरे के प्रति क्यों ज्यादा दयालु नहीं हो पाते। मैं उन लोगों की कद्र करती हूँ जो टाइम्स स्क्वेयर पर थे। जो सड़कों से लेकर थिएटर तक जमा थे। वे मेरे करीब नहीं आ पा रहे थे जब मैं आई। यदि मैं लाइट मेकअप में होती तो वे मुझे कभी नहीं देख पाते। यह मेकअप सिर्फ उनके लिए...

जो लोग सोचते हैं कि एक औरत के पिछले प्रेम प्रसंग उनके साथ प्रेम को कम कर देगा तो वे मूर्ख और कमजोर हैं। हर आदमी के लिए एक औरत नया प्यार लेकर आती है जिससे वह प्यार करती है और उसके जीवन में यह बार-बार नहीं होता। शोहरत यानी आप अपने को दूसरों की नजरों से देख रहे होते हैं लेकिन इससे भी ज्यादा मानीखेज यह है कि आप खुद अपने बारे में क्या सोचते हैं, रोज-ब-रोज की जिंदगी जीते हुए, जिंदा रहते हुए कि अब आगे क्या होगा...



और भी पढ़ें :