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'वेलकम टू द जंगल' की स्टार कास्ट ने सुनाए मजेदार किस्से, निर्देशक ने बताया 10 साल बाद क्यों आई 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की नई फिल्म
जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में आया था तब मैं एक्शन फिल्में कर रहा था। एक के बाद एक कई सारी एक्शन फिल्में कीँ ऐसे में कुछ पत्रकारों ने कहा कि अक्षय सिर्फ एक्शन फिल्में ही कर रहा है। फिर उसके बाद मैं कुछ लोगों से मिला हम साथ में जुड़े मैंने कॉमेडी फिल्म्स की। कॉमेडी फिल्म्स के बाद फिर मैंने रोमांटिक रोल निभाए और कुछ सोशल फिल्में भी की है या नहीं।
कुल जमा कहूं तो मुझे अलग अलग तरीके की फिल्में करना पसंद है। यह कहना है अक्षय कुमार का जो 'वेलकम टू द जंगल' फिल्म के साथ लोगों के सामने आ रहे हैं। इस फिल्म के प्रमोशन इंटरव्यू के दौरान अक्षय के साथ-साथ फिल्म के बाकी के कलाकार भी मौजूद थे। जैसे अरशद वारसी, सुनील शेट्टी, दिशा पटानी, जॉनी लीवर, आफताब शिवदासानी और निर्देशक अहमद खान भी जुड़ गए थे।
इतने सारे लोगों के बीच में बैठकर हम पत्रकारों ने जब बातें की तो अरशद वारसी की बदमाशियां और बीच के कमेंट से पूरा माहौल बदल जाता था। कई बार हंसी के ठहाके लगते थे और सवाल कहीं गुम हो जाते तथा फिर भी बातों के सिलसिले को जारी रखते हुए हम पत्रकारों ने कई सारी बातें फिल्म की स्टार कास्ट से कि प्रस्तुत है उससे के कुछ अंश-
नए कलाकारों का मल्टीस्टारर फिल्में ना करना
अरशद वारसी- अरे भाई काम मिल रहा है कर लेने दो क्यों नजर लगा रहे हो। मल्टीस्टारर है तो वही सही, लेकिन सच में मुझे ऐसा लगता है। ऐसी फिल्में करने में मुझे बहुत मजा आता है। जो नए नए कलाकार है ना अभी काम कर रहे हैं। लेकिन जब वह और मंझे हुए कलाकार बन जाएंगे उनमें और अनुभव जुड़ जाएगा तो उनको भी बहुत सारे लोगों के साथ काम करने में मजा आएगा। अब बस इंतजार कीजिए।
आफताब शिवदासानी- मल्टीस्टारर फिल्में करने में मुझे तो बहुत अच्छा लगता है। इसका मजा ही कुछ अलग है। कई बार जब आप सोलो हीरो होते हैं तो सेक्टर एक जैसा माहौल हो जाता है। लेकिन जब आप मल्टीस्टारर फिल्में करते हैं तो हर एक्टर अपने साथ एक अलग ही वाइब लेकर आता है। आप एक साथ जब काम करते हैं तो काम करने में मजा बढ़ जाता है। मस्ती बढ़ जाती है। मैं तो अक्षय जी के साथ ही 4 से 5 फिल्में कर चुका हूं। एक साथ मिलकर जब काम करते हैं ना तो काम भी बहुत बेहतरीन होता है।
अक्षय कुमार- नए कलाकारों का मल्टीस्टारर ना करना और हमारा करना भी सबकी अपनी-अपनी सोच है। नए कलाकारों को जो लगता है वह वह सोचते हैं और वह वैसा करते हैं। वह भी ठीक है और हम सब लोगों को लगता है कि नहीं। अब मल्टीस्टारर फिल्में करना चाहिए तो यह भी ठीक है।
सुनील शेट्टी- मल्टीस्टारर फिल्में ही आज सफलता की गारंटी लेकर आती है। यह एक बहुत सादा सा गणित है। सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है। सिंगल स्टारर फिल्मों का दारोमदार एक पर होता है जबकि मल्टीस्टारर फिल्मों की सफलता का दारोमदार बहुत सारे लोगों पर होता है। हम लोग अगर साथ में आकर फिल्में करें तभी फिल्म इंडस्ट्री का कुछ हो सकता है वरना फिल्म इंडस्ट्री का जो डाउनफॉल हुआ है इसी वजह से हुआ है। क्योंकि अगर आप दर्शकों की नजर से देखो तो भी यही सही है कि सब मिलकर काम करें।
अक्षय आप बेयर ग्रिल्स के साथ जंगल गए हैं और वेलकम टू द जंगल में भी जंगल है। ज्यादा खतरनाक क्या था?
यह तो शूटिंग है। इसमें क्या खतरनाक होगा? अक्षय के इस जवाब को सुनकर सुनील शेट्टी ने कुछ अलग ही रंग भर दिया इस सवाल पर सुनील शेट्टी ने कहा, यह वाला जंगल बहुत ज्यादा खतरनाक है यानी हमारे साथी जो जंगली लोग रहे हैं। यानी कि हमारी स्टार का वह बड़ी खतरनाक है।
बेयर ग्रिल्स वाले जंगल में तो जानवर थे जो हम से डर कर दूर रहते हैं लेकिन हमारी जो स्टार कास्ट वाले लोग हैं, इतने डेंजरस हैं कि क्या बताऊं। एक बार अक्षय के ऑफिस में मैं अहमद और अक्षय बैठे थे कि किसी सीन पर बातचीत चल रही थी और मेरे फोन पर एक फोन आया। अक्षय ने फोन उठाया और वह नहीं है ऐसा कह दिया। फिर मैंने पूछा अक्षय किसका फोन था अक्षय का मुझे क्या मालूम? तेरे सेलफोन पर फोन आया तो तुझे मालूम होगा या नहीं। आप समझे ऐसे खतरनाक लोगों के बीच में रहकर हम लोग काम कर रहे हैं।
इस फिल्म को लाने में इतना समय क्यों लगा? वेलकम बैक 2015 में आई थी।
अहमद खान- देखो यह फिल्म बहुत प्यार से बनाई जाने वाली फिल्म है। यह सारे ही लोगों को एक साथ लेकर आना एक बहुत बड़ा टास्क है। सभी लोग मसरूफ रहते हैं अपने अपने काम में और मेरी यह फिल्म ऐसी है कि दो कलाकारों ने शूट कर लिया। दो दिन बाद फिर किसी दूसरे कलाकार ने शूट कर लिया। वह मुमकिन नहीं था। ऐसे में जरूरी था कि सारे ही कलाकार एक साथ इतने सारे लोगों की डेट को अरेंज करना बहुत टेढ़ी खीर थी। इसलिए समय लग गया।
आजकल की फिल्मों में एक्शन की अगर बात कही जाए तो बहुत ज्यादा हिंसात्मक हो गई है। आपका क्या कहना है
अक्षय- यह तो निर्भर करता है कि आप किस तरीके की फिल्में कर रहे हैं? मुझे एक्शन करना बहुत अच्छा लगता है, पसंद करता हूं, लेकिन बहुत ज्यादा हिंसात्मक कोई चीज हो जाता है, मुझे वह पसंद नहीं आएगा। और वेलकम टू द जंगल की बात कहूं तो इसमें इतनी साफ-सुथरे तरीके से निर्देशक ने फिल्म बनाई है कि आपको देखकर मजा आ जाएगा। आप अपने दादी या नानी के साथ मिलकर बैठकर आप इस फिल्म को एंजॉय करेंगे।
सुनील शेट्टी- देखिए स्क्रिप्ट कैसी है उस पर निर्भर करता है। अगर आप कोई एक वॉर फिल्म बना रहे हैं और उस कहानी को दिखा रहे हैं। उसमें आप लड़ाई झगड़े एक्शन नहीं दिखा रहा है। तब वह जस्टिफाई नहीं लगता है। सब कुछ निर्भर करता है कि किस तरीके की फिल्म आप बनाना चाह रहे हैं? आप उसमें हिंसा ही नहीं दिखाएंगे और उसमें आप सच नहीं दिखाएंगे तो वह नहीं चलता है।
क्या इस फिल्म में हमें मजनू भाई और उदय शेट्टी भी दिखाई देंगे? लोग मिस करेंगे।
अहमद खान- इस फिल्म में मजनू भाई और उदय शेट्टी को कैसे दिखाया है तो इतना बताता हूं कि उसमें मजनूं भाई ने गधे पर घोड़ा बैठाया था आपनी पेंटिंग में जबकि एक बार मजनूं भाई के भी भाई- अरशद ने गधे के ऊपर घोड़ा बैठा दिया है। उदय शेट्टी की अगर मैं बात कहूं तो उनका भी भाई यहां पर मौजूद है यानी कि सुनील शेट्टी। उदय बहुत कंट्रोल में रहते थे। वहीं पर सुनील शेट्टी बिना किसी कंट्रोल में काम करते हैं लेकिन जब आपकी और पूरी फिल्म देखेंगे तो आपको पहले ही बता दूं कि आप मिस कुछ नहीं करने वाले हैं।
