चमकती रोशनी, कैमरों की फ्लैश और सोशल मीडिया की दुनिया में अनन्या पांडे का नाम आज बॉलीवुड की नई पीढ़ी की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल है। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसी लड़की भी है जो लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है, जो अपनी कमियों को स्वीकार करती है और जो हर नई भूमिका के साथ खुद को बदलते देखना चाहती है।
फिल्मफेयर के मई-जून 2026 अंक के लिए दिए गए विशेष साक्षात्कार में अनन्या ने अपने करियर की यात्रा, नेपोटिज्म की बहस, आत्मविश्वास की कमी, सोशल मीडिया के दबाव और परिवार से जुड़े भावुक पलों पर खुलकर बातचीत की। यह बातचीत किसी स्टार के जवाबों से ज्यादा एक युवा कलाकार के आत्ममंथन जैसी महसूस होती है।
मुझे विशेष अवसर मिले थे, लेकिन उन्हें साबित करना भी जरूरी था
बॉलीवुड में जब भी स्टार किड्स की चर्चा होती है, अनन्या पांडे का नाम अक्सर उस बहस का हिस्सा बन जाता है। लेकिन उन्होंने कभी इस सच्चाई से दूरी बनाने की कोशिश नहीं की कि उन्हें इंडस्ट्री में प्रवेश का मौका अपेक्षाकृत आसान रास्ते से मिला।
अनन्या कहती हैं, “जब मैंने शुरुआत की थी, तब मुझे विशेष अवसर मिले थे और आज भी मिलते हैं। मैं हमेशा से अभिनेत्री बनना चाहती थी। जब मुझे मौका मिला तो मेरी यही कोशिश रही कि मैं उसका पूरा फायदा उठाऊं और किसी को निराश न करूं।”
उनके इस बयान में बचाव कम और जिम्मेदारी का एहसास ज्यादा दिखाई देता है। वह मानती हैं कि अवसर मिलना एक सौभाग्य हो सकता है, लेकिन दर्शकों का भरोसा जीतना केवल मेहनत से ही संभव है।
एक फिल्म जिसने बदल दी लोगों की सोच
अनन्या के करियर में कई फिल्में और प्रोजेक्ट आए, लेकिन वह मानती हैं कि गहराइयां उनके लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
इस फिल्म के निर्देशक शकुन बत्रा को याद करते हुए वह कहती हैं, “शकुन बत्रा ने मेरा एक अलग रूप देखा। उन्हें लगा कि मैं उस समय की अपनी वास्तविक छवि से कहीं अधिक गहरे, मजबूत और परिपक्व किरदार निभा सकती हूं।”
शायद यही वजह थी कि गहराइयां के बाद पहली बार लोगों ने अनन्या को सिर्फ एक ग्लैमरस स्टार किड के रूप में नहीं, बल्कि एक गंभीर अभिनेत्री के रूप में भी देखना शुरू किया। उस फिल्म ने उनके भीतर के कलाकार को नई पहचान दी।
असुरक्षा हर किसी के जीवन का हिस्सा है
बॉलीवुड की चमक-दमक को देखकर अक्सर लोगों को लगता है कि सितारों के जीवन में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं होती। लेकिन अनन्या इस धारणा को गलत मानती हैं।
वह कहती हैं, “हर इंसान किसी न किसी असुरक्षा से गुजरता है। असली बात यह है कि आप उससे कैसे निपटते हैं। उसे प्रेरणा और बेहतर काम करने की ताकत में बदल देना चाहिए।”
यह सोच शायद उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत भी है। आलोचना, ट्रोलिंग और लगातार होने वाली तुलना के बावजूद उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया, बल्कि उसे आगे बढ़ने की ऊर्जा में बदला।
मैं खुद अपनी सबसे बड़ी आलोचक हूं
अनन्या के व्यक्तित्व का एक दिलचस्प पहलू उनका आत्मविश्लेषण है। वह अपनी गलतियों और कमजोरियों को स्वीकार करने से नहीं डरतीं।
वह कहती हैं, “मेरा हास्यबोध भी आत्म-जागरूक है। मैं खुद अपनी सबसे बड़ी आलोचक हूं। मैंने अपने पिता से सीखा है कि खुद पर हंसना बिल्कुल ठीक है। बेशक, इसमें किसी तरह का अपमान नहीं होना चाहिए, लेकिन आपको मजाक को सहजता से लेने और दूसरों के साथ हंसने में सक्षम होना चाहिए।”
आज जब सोशल मीडिया पर हर छोटी-बड़ी बात पर प्रतिक्रियाएं आती हैं, यह सोच किसी कलाकार को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है।
कॉल मी बे ने दिखाया नया आत्मविश्वास
डिजिटल मंच पर आई कॉल मी बे अनन्या के करियर की सबसे चर्चित परियोजनाओं में रही। यह वह मौका था जब उन्होंने पहली बार एक ऐसी कॉमेडी का नेतृत्व किया जिसमें पूरी कहानी उनके कंधों पर टिकी हुई थी।
अनन्या बताती हैं, “जब कॉल मी बे की बात आई, तब तक मैंने कभी किसी पूरी तरह कॉमेडी मूवी में मुख्य भूमिका नहीं निभाई थी। मुझे इसका बेबाक और आत्म-जागरूक हास्य बहुत पसंद आया।”
इस परियोजना ने दर्शकों को अनन्या का वह रूप दिखाया जो पहले शायद उन्होंने कभी नहीं देखा था।
अभिनय में आज भी निर्देशक पर सबसे ज्यादा भरोसा
सोशल मीडिया के दौर में कलाकारों को हर दिन हजारों राय सुनने को मिलती हैं। लेकिन अभिनय के मामले में अनन्या आज भी एक व्यक्ति की राय को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं, अपने निर्देशक की।
वह कहती हैं, “मैं पूरी तरह निर्देशक की अभिनेत्री हूं। किसी किरदार को कैसे समझना है और उसे कैसे निभाना है, इसके लिए मैं अपने निर्देशकों के मार्गदर्शन पर भरोसा करती हूं।”
यह बयान बताता है कि उनके लिए अभिनय केवल लोकप्रियता का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने और विकसित होने की निरंतर प्रक्रिया है।
सफलता का अर्थ अब बदल चुका है
करियर की शुरुआत में सफलता का मतलब अक्सर लोकप्रियता, बॉक्स ऑफिस और सुर्खियां होती हैं। लेकिन आज अनन्या इसे अलग नजरिए से देखती हैं।
वह कहती हैं, “मैं अब चीजों को लोकप्रिय और सार्थक जैसी श्रेणियों में नहीं बांटती। कोई फिल्म रिलीज के बाद लोकप्रिय हो सकती है, लेकिन वह हिस्सा पूरी तरह हमारे हाथ में नहीं होता।”
यह सोच एक परिपक्व कलाकार की है, जो अब परिणाम से ज्यादा अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहती है।
जब अहान पांडे को देखकर छलक पड़े आंसू
इस बातचीत का सबसे भावुक हिस्सा उनके चचेरे भाई अहान पांडे से जुड़ा था। सैयारा के जरिए मिली सफलता पर बात करते हुए अनन्या की भावनाएं साफ झलकने लगीं।
उन्होंने कहा, “जब मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई थी तब मैं नहीं रोई थी, लेकिन जब मैंने अहान को बड़े पर्दे पर देखा तो मैं फूट-फूटकर रो पड़ी। मुझे उस पर बहुत गर्व था और यह देखकर बेहद खुशी हुई कि लोगों ने उसे इतना प्यार दिया।”
वह आगे कहती हैं, “मैं उसे लगातार आगे बढ़ते हुए देखना चाहती हूं। सबसे अच्छी बात यह है कि सफलता उसके सिर पर नहीं चढ़ी है। आज भी हर तारीफ और हर फोन कॉल को लेकर उसके भीतर बच्चों जैसी उत्सुकता दिखाई देती है।”
इन शब्दों में सिर्फ एक अभिनेत्री की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि परिवार के प्रति गहरा लगाव भी झलकता है।
अब सिर्फ किरदार नहीं, खुद को बदलने वाली कहानियां तलाश रही हैं अनन्या
साल 2019 में अपने सफर की शुरुआत करने वाली अनन्या पांडे आज उस मुकाम पर हैं जहां वह केवल फिल्में नहीं चुन रहीं, बल्कि ऐसे किरदार तलाश रही हैं जो उन्हें एक बेहतर कलाकार और बेहतर इंसान बना सकें।
शायद यही वजह है कि उनके हालिया कामों में लगातार विविधता दिखाई देती है। एक तरफ भावनात्मक और जटिल किरदार हैं, तो दूसरी तरफ हल्के-फुल्के और मनोरंजक प्रयोग। लेकिन हर भूमिका में एक चीज समान है कि खुद को पहले से बेहतर साबित करने की कोशिश।
और शायद यही कोशिश आने वाले वर्षों में अनन्या पांडे को बॉलीवुड की भीड़ में अलग पहचान दिलाएगी।