कारगिल युद्ध को दर्शाती बॉलीवुड फिल्में

Last Updated: बुधवार, 22 जुलाई 2020 (18:23 IST)
26 जुलाई के रूप में मनाया जाता है। कारगिल युद्ध के बारे में सभी जानते हैं कि किस तरह से भारतीय जांबाजों ने अपनी जान की बाजी लगा कर तिरंगे की शान बढ़ाई थी।

युद्ध भूमि पर दिखाए गए शौर्य और उसके बाद के होने वाले प्रभाव पर फिल्ममेकर्स ने कई फिल्में बनाई हैं। खासतौर पर विदेशी सिनेमा में युद्ध और उसके परिणामों को फिल्मों के माध्यम से सूक्ष्मता के साथ रेखांकित किया गया है।

भारतीय फिल्ममेकर जरूर इस मामले में पीछे रहे हैं। जो भी फिल्में बनी हैं उनमें इतना ज्यादा ड्रामेटाइजेशन है कि फिल्में नकली लगने लगती हैं। कारगिल युद्ध पर जेपी दत्ता ने फिल्म बनाई है। इसके अलावा भी कुछ फिल्मों में कारगिल युद्ध का उल्लेख है।

एलओसी : कारगिल (2003)

निर्माता-निर्देशक : जे.पी. दत्ता
कलाकार : संजय दत्त, अजय देवगन, नागार्जुन, सुनील शेट्टी, अभिषेक बच्चन, अक्षय खन्ना, मनोज बाजपेई, रानी मुकर्जी, करीना कपूर खान, रवीना टंडन, महिमा चौधरी, ईशा देओल
कहां देखें: यूट्यूब

वॉर फिल्म 'बॉर्डर' की सफलता से उत्साहित होकर फिल्मकार जेपी दत्ता ने 'एलओसी : कारगिल' फिल्म बनाई जो कि कारगिल युद्ध के चार वर्ष बाद रिलीज हुई। जेपी दत्ता ने स्टार्स की फौज खड़ी कर दी। ऐसी स्टारकास्ट बहुत कम देखने को मिलती है। कारगिल युद्ध को फिल्म में समेटना आसान नहीं था और जेपी दत्ता ने अपनी बात कहने में 255 मिनट का समय लिया। रनिंग टाइम की बाद की जाए तो यह भारत की सबसे लंबी फिल्म है। फिल्म में मुख्यत: लाइन ऑफ कंट्रोल और ऑपरेशन विजय की बात दर्शाई गई। किस तरह से भारतीय जांबाजों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, यह बात रूपहले परदे पर देखना रोचक है। फिल्मांकन के दौरान भारतीय सेना ने तकनीकी रूप से सहायता की। कारगिल युद्ध के दौरान जिन हथियारों का उपयोग किया गया था वो भी जेपी दत्ता की टीम को दिए। इनमें INSAS rifle, Swedish Bofors Haubits FH77 artillery guns, BM-21 Grad multiple rocket launchers और Mil Mi-17 हेलीकॉप्टर्स दिखाए गए। जेपी दत्ता ने अथक परिश्रम से यह फिल्म बनाई, लेकिन लूज़ एडिटिंग, कुछ अनावश्यक प्रसंग और गानों की वजह से फिल्म बहुत ज्यादा लंबी हो गई और यही कारण रहा कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षा से कम प्रदर्शन किया। हालांकि कारगिल युद्ध को यदि आप परदे पर देखना चाहते हैं तो यह यह फिल्म एक बेहतर विकल्प हो सकती है।

(2003)

निर्माता : संजय रेड्डी, पार्थ अरोरा, साकेत बहल, करण ग्रोवर
निर्देशक : अश्विनी चौधरी
कलाकार : ओम पुरी, रेवती, गुल पनाग, संजय सूरी, यशपाल शर्मा
कहां देखें: अमेजॉन प्राइम

कारगिल वॉर से फिल्म का धूप का कनेक्शन थोड़ा अलग किस्म का है। इस युद्ध में शहीद हुए एक सैनिक के परिवार को किस तरह से भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ना पड़ता है यह दिखाया गया है। कारगिल वॉर में 'बैटल ऑफ टाइगर हिल' में कैप्टन अनुज नय्यर 5 जुलाई 1999 को शहीद हुए। सरकार की ओर से कम्पनसेशन के बतौर एक पेट्रोल पम्प की फ्रेंचाइज परिवार देने की घोषणा की गई। फिल्म में दर्शाया गया है कि किस तरह से शहीद के पिता को लालफीताशाही का सामना करना पड़ा। ओम पुरी और रेवती का सशक्त अभिनय देखने लायक है। समीक्षकों ने फिल्म को काफी सराहा।

(2003)

निर्माता : रवीना टंडन
निर्देशक : गौरव पांडे
कलाकार : रवीना टंडन, अली खान
कहां देखें: अमेजॉन प्राइम

कहा जाता है कि कारगिल वॉर लड़ने वाले सैनिकों के साथ रवीना टंडन ने तीन दिन बिताए थे और वही से उन्हें यह फिल्म बनाने की प्रेरणा मिली। फिल्म में 1999 का समय दिखाया गया है। एक तरफ कारगिल वॉर हो रहा था तो दूसरी ओर क्रिकेट का विश्व कप खेला जा रहा था। फिल्म की नायिका का पति युद्ध में गया हुआ है और लापता है। सलमान खान और सचिन तेंडुलकर भी फिल्म में नजर आए। कमजोर निर्देशन के कारण फिल्म पसंद नहीं की गई।

(2004)

निर्माता : रितेश सिधवानी
निर्देशक : फरहान अख्तर
कलाकार : रितिक रोशन, प्रीति जिंटा, अमिताभ बच्चन, ओम पुरी, अमरीश पुरी
कहां देखें: अमेजॉन प्राइम

फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित 'लक्ष्य' ऐसे युवक की कहानी पर आधारित फिल्म है जो लक्ष्यविहीन है। आलसी युवक के एक चुस्त आर्मी ऑफिसर के रूप में परिवर्तित होने की यात्रा को फिल्म में दर्शाया गया है। फिल्म में कारगिल वॉर को बैकड्रॉप में दिखाया गया है जिसमें किरदार काल्पनिक है। फिल्म जब रिलीज हुई थी तो खास प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन टेलीविजन पर इसे बहुत पसंद किया गया और इसकी चर्चा अभी भी होती है। रितिक रोशन के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक 'लक्ष्य' को भी माना जाता है।

टैंगो चार्ली (2005)

निर्माता : नितिन मनमोहन
निर्देशक : मणि शंकर
कलाकार : अजय देवगन, बॉबी देओल, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, नंदना सेन
कहां देखें: यूट्यूब


टैंगो चार्ली में में प्रस्तुत किया गया है कि सच्चे सिपाही जन्म नहीं लेते, बस बन जाते हैं। भारतीय सीमा सुरक्षा बल में बतौर नव नियुक्त सिपाही के तथाकथित युद्ध में कठोर अनुभवों पर फिल्म केंद्रित है। फिल्म में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य बोडो गुट से मुठभेड़, आंध्र प्रदेश में नक्सलियों से टक्कर, गुजरात की सांप्रदायिक हिंसा को भी दर्शाया गया है। फिल्म के आखिरी हिस्से में कारगिल युद्ध है। फिल्म के अंतिम वाक्य में कहा जाता है- जंग किसी भी सभ्यता का अंतिम पड़ाव है, जंग बेमतलब है और जिंदगी बहुत कीमती।

(2011)

निर्माता : मधु मंटेना, शीतल विनोद तलवार
निर्देशक : पंकज कपूर
कलाकार : शाहिद कपूर, सोनम कपूर
कहां देखें: अमेजॉन प्राइम

मौसम की कहानी 1992 से 2002 यानी कि दस वर्षों में फैली हुई है। इस दौरान बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना, मुंबई दंगे, 1993 में मुंबई में हुए विस्फोट, कारगिल युद्ध, 9/11 का हमला जैसी प्रमुख घटनाओं को भी फिल्म में समेटा गया है। यह इंडियन एअर फोर्स ऑफिसर की प्रेम कहानी है जिसे सगाई के पहले कारगिल युद्ध के लिए बुलावा आ जाता है।



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