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शनि ग्रह जब मेष में जाएगा तब होगा विश्व युद्ध या भारत-पाक का महायुद्ध, बहुत कम बचा है समय?
Saturn's transit into Aries in 2027: तीन ग्रह युद्ध का कारण बनते हैं- मंगल, शनि और राहु। जब भी इन ग्रहों का आपसी दृष्टी, युति या षटाष्टक संबंध बनता है तब देश और दुनिया में युद्ध, भूकंक या जनविद्रोह जैसा कुछ न कुछ होता है। पिछले सैंकड़ों सालों के रिकॉर्ड के अनुसार शनि का मेष राशि में गोचर किसी बड़े जनविद्रोह या युद्ध का संकेत देता है। चलिए जानते हैं शनि कब जाएंगे मेष राशि में और तब क्या होगा।
शनि का एक राशि में समयावधि:
शनि ग्रह (Shani) एक राशि में लगभग 2.5 से 3 साल तक रहता है और राशि चक्र (12 राशियां) पूरा करने में उसे करीब 30 साल का समय लगता है। इसका अर्थ है कि मेष राशि में उसे आने में 30 साल लगते हैं। मेष (Aries) शनि की 'नीच' राशि मानी जाती है। नीच का शनि देश और दुनिया में नकारात्मक परिस्थितियों को जन्म देता है। पिछले 500 वर्षों (लगभग 1526 से 2026 तक) का रिकॉर्ड और आने वाले समय का विवरण नीचे दिया गया है।
शनि का मेष राशि में गोचर (1526 से 2026):
शनि हर 29-30 साल में मेष राशि में लौटता है। यहाँ प्रमुख वर्षों की सूची दी गई है:
सदीशनि का मेष राशि में प्रवेश (अनुमानित काल)
16वीं सदी: 1530-1533, 1560-1563, 1589-1592
17वीं सदी: 1619-1622, 1648-1651, 1678-1681
18वीं सदी: 1707-1710, 1737-1740, 1766-1769, 1796-1799
19वीं सदी: 1825-1828, 1855-1858, 1884-1887
20वीं सदी: 1910-1912, 1939-1941, 1968-1971, 1998-2000
नोट: उपरोक्त सन में शनि के ढाई साल के मेष में गोचर के दौरान देश और दुनिया में क्या हुआ इसे आप खुद ही चेक कर सकते हैं।
आधुनिक काल की सटीक तिथियां (20वीं और 21वीं सदी):
1939-1941: 27 अप्रैल 1939 से 18 जून 1941 तक। (इस दौरान द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ था)।
1968-1971: 17 जून 1968 से 27 अप्रैल 1971 तक। इस दौरान भारत-पाकिस्तान का युद्ध, भारत में कम्युनिस्ट/नक्सलवादी विद्रोह का उभार, वियतनाम युद्ध: टेट आक्रामक, प्राग स्प्रिंग और सोवियत आक्रमण, फ्रांस में जनविद्रोह, नाइजीरियाई गृहयुद्ध, कंबोडियाई गृहयुद्ध, 1998-2000: 17 अप्रैल 1998 से 6 जून 2000 तक। इस दौरान कारलिग युद्ध, कोसोवा का युद्ध, द्वितीय कांगो युद्ध, द्वितीय रशिया-चेचन युद्ध, इरिट्रिया-इथियोपिया युद्ध आदि कई युद्ध हुए, सुनामी आई और बड़े भूकंप भी आए।
वर्ष 2027 में शनि करेगा मेष राशि में गोचर:
वैसे देखा जाएगा तो शनि के मकर, कुंभ और मीन राशि के गोचर काल में कोरोना वायरस, रशिया यूक्रेन युद्ध, इजराइल हमास युद्ध, इजराइल ईरान युद्ध, अमेरिका ईरान युद्ध, भारत और पाकिस्तान का युद्ध हम देख ही चुके हैं और अब आशंका जताई जा रही है कि शनि ग्रह जब 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेगा तब देश और दुनिया में युद्ध, भूकंप और जनविद्रोह का एक नया दौरा प्रारंभ होगा जो पहले की अपेक्षा भयानक हो सकता है। शनि इस राशि में ढाई साल तक रहेगा, इस दौरान वह मार्गी और वक्री होकर आगे पीछे की राशियों में भी गोचर करता रहेगा।
निष्कर्ष:
जब-जब शनि मेष में रहा है, दुनिया में बड़े सत्ता परिवर्तन, युद्ध या सामाजिक क्रांतियां देखी गई हैं। मेष राशि में शनि अपनी शक्ति खो देता है, जिसे ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता। इस दौरान सरकार और जनता में अनुशासन और धैर्य की भारी कमी देखी जाती है। अभी शनि अपनी स्वराशि मीन में गोचर कर रहा है। इसके बाद यह 2027 में मेष में प्रवेश करेगा।
