देश में सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। ये नियम ट्रक से लेकर कार और बाइक तक हैं। आइए जानते हैं इन फैसलों के बारे में।
1. डेढ़ लाख तक का कैशलेस इलाज
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले किसी भी व्यक्ति को देशभर के चयनित अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। इस योजना के तहत दुर्घटना के बाद पहले 7 दिनों के भीतर घायल व्यक्ति 1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज कराने का हकदार होगा। सरकार का मानना है कि हादसे के बाद शुरुआती “गोल्डन आवर” में इलाज न मिलने के कारण बड़ी संख्या में जानें चली जाती हैं, जिसे यह योजना काफी हद तक रोक सकेगी।
2. नई बाइक के साथ फ्री ISI वाले हेलमेट
भारत में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अब हर नई बाइक के साथ दो ISI मार्क वाले हेलमेट मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस नई नीति की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों और उनके सहयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह कदम न केवल हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा देगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने में भी मदद करेगा। आइए जानते हैं इस पहल के बारे में और कैसे यह हमारे देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने में योगदान देगी।
3. Bharat NCAP 2.0 क्रैश टेस्ट और सख्त सेफ्टी रेटिंग
भारत ने कार की सेफ्टी के लिए Bharat NCAP 2.0 क्रैश टेस्ट और सख्त सेफ्टी रेटिंग शुरू कर दी है। भारत का अपना कार क्रैश टेस्ट कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इसमें कारों को 1 से 5 तक रेटिंग दी जाएगी। इससे कार कंपनियों पर भी सख्ती होगी। 5 स्टार रेटिंग के लिए कार में 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर देना होगा।
4. ऑटोमोबाइल कंपनियां बनाएंगी स्लीपर कोच बसें
बस हादसों को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर कोच बसों के निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्लीपर कोच बसें स्थानीय बॉडी बिल्डर्स के जरिए नहीं बनाई जाएंगी। इनका निर्माण केवल अधिकृत ऑटोमोबाइल कंपनियों के जरिए ही किया जाएगा। बस सुविधाओं की मान्यता अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथों में होगी, ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके। जो बसें अभी सड़कों पर चल रही हैं, उन्हें रेट्रोफिट किया जाएगा। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, हथौड़ों के साथ इमरजेंसी एग्जिट और इमरजेंसी लाइटिंग लगाना अनिवार्य होगा।
5. ट्रकों में एसी केबिन जरूरी (AC In Truck Cabins)
भारत जैसे गर्म देश में ट्रक ड्रायवर दिन के 12 से 14 घंटे सड़कों पर बिताते हैं। भीषण गर्मी के बीच लोहे के केबिन में लगातार ड्राइव करना किसी सजा से कम नहीं है। ट्रक ड्रायवरों पर यह तनाव कई बार दुर्घटना का भी कारण बनाता है। इसे देखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 2025 के बाद देश में कुछ खास कैटेगरी के ट्रकों के केबिन में AC को अनिवार्य कर दिया है। ट्रकों में AC केबिन को अनिवार्य करने से जुड़े ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुहर लगा दी है।
उन्होंने ट्वीट कर बताया था कि N2 और N3 कैटेगरी के ट्रकों के केबिन में एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया जाएगा। अक्टूबर 2025 के बाद बनने वाले ट्रकों में एसी कैबिन जरूरी है। वॉल्वो और स्कैनिया जैसी कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों के हाई-एंड ट्रक पहले से ही AC केबिन के साथ आते हैं। वहीं टाटा, महिंद्रा, अशोक लेलेंड जैसी भारतीय ट्रक कंपनियां ऐसा करने में पीछे रही हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय ने पहली बार 2016 में ये प्रस्ताव दिया था। Edited by: Sudhir Sharma