27 जुलाई से शनि की उल्टी चाल शुरू, 5 राशियों पर मंडराएगा संकट! बचाव के लिए जरूर करें ये 5 उपाय
जब शनि महाराज अपनी चाल बदलते हैं या वक्री होते हैं, तो उनका प्रभाव सभी राशियों पर गहरा पड़ता है। यदि आपकी कुंडली में शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती या महादशा चल रही है, तो इन उपायों को 27 जुलाई से अवश्य शुरू करें। शनि महाराज 11 दिसंबर तक यानी 138 दिनों तक वक्र गोचर करेंगे। मेष, कुंभ, मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती है जबकि सिंह और धनु पर ढैया का प्रभाव है। इन 5 राशियों को तो करना ही चाहिए ये उपाय।
1. हनुमान जी की शरण और सुंदरकांड/हनुमान चालीसा
उपाय: रोजाना या विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।
लाभ: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कभी कष्ट नहीं देते। हनुमान जी की उपासना से वक्री शनि का अशुभ प्रभाव तुरंत शांत होता है।
2. पीपल के वृक्ष में जल और दीपक
उपाय: शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। इसके साथ ही पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और 7 बार परिक्रमा करें।
सावधानी: ध्यान रखें कि दीपक जलाने के बाद पीछे मुड़कर न देखें और सीधे घर आ जाएं।
3. छाया दान (सरसों के तेल का दान)
उपाय: शनिवार के दिन एक लोहे के कटौरे या बर्तन में सरसों का तेल लें। उसमें अपना चेहरा (छाया) देखें और फिर उस तेल को किसी गरीब/ज़रूरतमंद को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आएं।
लाभ: इसे 'छाया दान' कहा जाता है। यह शनि के कड़े और कष्टकारी प्रभावों को दूर करने का सबसे कारगर उपाय माना जाता है।
4. शनि मंत्रों का जाप
उपाय: शाम के समय शाम ढलने के बाद शनि मंदिर में जाकर या घर के पूजा स्थान पर सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि देव के बीज मंत्र का 108 बार जाप करें:
मंत्र: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" या "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
नियम: जप करते समय कभी भी शनि देव की मूर्ति की आँखों में सीधे न देखें, हमेशा उनके चरणों की ओर देखकर ही प्रार्थना करें।
5. गरीबों, श्रमिकों और असहायों की सेवा
उपाय: शनि देव न्याय के देवता हैं और कड़ी मेहनत करने वाले मज़दूरों, सफाई कर्मचारियों व दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन काले तिल, काले उड़द, जूते-चप्पल, छाता या काले कपड़े किसी ज़रूरत मंद को दान करें।
लाभ: किसी गरीब या असहाय का अपमान न करें। ऐसा करने से शनि देव अत्यंत प्रसन्न होकर वक्री अवस्था में भी शुभ फल प्रदान करते हैं।

