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Written By WD Feature Desk
Last Modified: शनिवार, 11 अप्रैल 2026 (18:07 IST)

रोग पंचक शुरू: भूलकर भी न करें ये काम, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

The image depicts a temple surrounded by houses and trees, a portrayal of the moon and constellations in the sky, and information regarding the Panchak period.
आज ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 12 अप्रैल 2026 अर्धरात्रि से पंचक का प्रारंभ हो रहा है। हिंदू पंचांग और ज्योतिष में पंचक के समय को कुछ कार्यों के लिए बेहद अशुभ, तो कुछ के लिए सामान्य माना जाता है। यहां पंचक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।

1. पंचक के नाम:

रविवार का रोग पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक, शनिवार को पड़ने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। बुधवार और गुरुवार को सोमवार और मंगलवार का पंचक माना जाता है। इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है। शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है। उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है और रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है।
 

2. क्या होता है पंचक?

जब चंद्रमा धनिष्ठा (का आधा भाग), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती- इन पांच नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तो उस अवधि को 'पंचक' कहा जाता है। चूंकि चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन रहता है, इसलिए इन पांच नक्षत्रों को पार करने में उसे लगभग 5 दिन का समय लगता है।

3. 'रोग पंचक' का संयोग

यदि चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती नक्षत्र तक का सफर रविवार के दिन शुरू करे, तो उसे 'रोग पंचक' कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील माना जाता है।
शारीरिक कष्ट: इस दौरान बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि कोई व्यक्ति पहले से बीमार है, तो उसकी तकलीफ बढ़ सकती है।
मानसिक तनाव: यह 5 दिन मानसिक रूप से भी अशांत कर सकते हैं। व्यक्ति बिना कारण के चिड़चिड़ापन या तनाव महसूस कर सकता है।
यज्ञ-अनुष्ठान पर रोक: रोग पंचक के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य या शुभ अनुष्ठान की मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि उनका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
 

4. सावधानी और उपाय:

सेहत का ख्याल: इस समय खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। छोटी सी बीमारी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दवा का प्रारंभ: ऐसी मान्यता है कि रोग पंचक के दौरान नई दवा का सेवन शुरू करना उतना प्रभावी नहीं होता (यदि बहुत इमरजेंसी न हो)।
धार्मिक उपाय: रोग पंचक के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप या सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना जाता है।
 

5. पंचक में वर्जित 5 मुख्य कार्य

शास्त्रों के अनुसार, पंचक के दौरान ये पांच कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए:
घास या लकड़ी एकत्र करना: इस समय ईंधन, घास या लकड़ी इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है (अग्नि का भय रहता है)।
चारपाई या बेड बनवाना: पंचक में बिस्तर बनवाना या नया बेड घर लाना वर्जित है।
घर की छत डलवाना: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके या घर के लेंटर/छत का काम इस समय नहीं करना चाहिए।
दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण को यम की दिशा माना गया है, पंचक में इस दिशा में यात्रा करना कष्टकारी हो सकता है।
अंतिम संस्कार: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव के साथ पांच कुश (घास) के पुतले बनाकर जलाए जाते हैं ताकि परिवार पर आने वाले 'पंचक दोष' को शांत किया जा सके।
 

6. शुभ कार्य और उपाय

क्या करें: चूंकि आज बुध का राशि परिवर्तन भी हुआ है, इसलिए बौद्धिक कार्यों के लिए समय बुरा नहीं है। मंगनी, विवाह या अन्य शुभ कार्यों के लिए नक्षत्रों की स्थिति देखी जाती है, केवल पंचक होने से हर शुभ कार्य नहीं रुकता।
उपाय: यदि कोई कार्य बहुत अनिवार्य हो, तो गायत्री मंत्र का जाप करें या हनुमान चालीसा का पाठ करके कार्य प्रारंभ करें। शनिवार का पंचक होने के कारण शनि देव की उपासना और पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाना विशेष फलदायी होगा।
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