ओंकारेश्वर में फिर अव्यवस्थाओं से जूझेंगे श्रद्धालु

खंडवा | Naidunia| पुनः संशोधित मंगलवार, 10 जनवरी 2012 (00:44 IST)
जनवरी माह के दूसरे पखवाड़े में मकर संक्रांति, अमावस्या और नर्मदा जयंती के मौके पर तीर्थनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। इस बार भी अभी तक प्रशासन ने सुविधाओं के लिहाज से कोई पुख्ता नहीं किए हैं।


विदित हो कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति तथा 23 जनवरी को सोमवती अमावस्या रहेगी। इसी तरह 30 जनवरी को नर्मदा जयंती मनाया जाएगा। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्नान एवं दर्शन-पूजन के लिए आएँगे। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। यहाँ तक कि उन्हें पीने का पानी भी नहीं मिल पाता।

गंदगी का आलम

सामाजिक संस्थाओं ने अपने स्तर से पानी की टंकी बनवाई थी लेकिन उसमें भी पर्याप्त पानी नहीं है। नर्मदा किनारे घाटों पर विद्युत व्यवस्था नहीं है। घाटों पर काई एवं गाद इस तरह से जमी है कि नहाने में न सिर्फ असुविधा होती है बल्कि लोग फिसलकर गिर पड़ते हैं। अस्थायी बस स्टैंड से लेकर मुख्य मंदिर तक कहीं भी महिलाओं के लिए एक भी सुविधाघर नहीं है। स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी बुरे दौर में है। नगर में मात्र एक चिकित्सक उपलब्ध है। वह भी महीने में बीस दिन बाहर रहते हैं। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। नाले-नालियों का गंदा पानी सीधे नर्मदा में समाहित हो रहा है। पूरे नगर में गंदगी के कारण मच्छरों का साम्राज्य है। ओंकार पर्वत पर भी न तो पर्याप्त द्यवद्युत व्यवस्था है और न ही पीने का पानी उपलब्ध है।

एसडीएम रजनीश कसेरा द्वारा मंदिर की कमान संभालने के बाद में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम के कदम भी उठाए गए लेकिन अब वे बीच में ही छूट गए। एसडीएम मंदिर की आय बढ़ाने की दिशा में अधिक सक्रिय देखे जा रहे हैं। कलेक्टर कवींद्र कियावत से उम्मीदें जागी थी लेकिन महापर्वों में उनकी भी उपस्थिति नहीं रही। यहाँ की व्यवस्थाओं के सिलसिले में उन्होंने कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए।

यहाँ अपराधों का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। एक वर्ष में हत्या की 6 वारदातें तीर्थनगरी में हो चुकी हैं। गत दिवस भी एक हत्या हो चुकी है। बढ़ते अपराधों के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना घर करने लगी है। किसी नेता-मंत्री की अगवानी के दौरान छावनी में तब्दील होने वाले ओंकारेश्वर में ऐसी बड़ी वारदातों के दौरान पुलिस का कोई आला अधिकारी झाँकना तक जरूरी नहीं समझता।



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