तेनालीराम की कहानियां : जाड़े की मिठाई


राजा बोले, ‘वाह, इतनी बढ़िया मिठाई, यहां अंधेरे में कहां से आई?’


तभी को एक कोने में पड़ी पत्तियां दिखाई दीं। वह अपनी जगह से उठा और कुछ पत्तियां इकट्ठी कर आग लगा दी। फिर बोला, ‘महाराज, यह गुड़ है।’

‘गुड़… और इतना स्वादिष्ट!’

‘महाराज, जाड़ों में असली स्वाद गरम चीज में रहता है। यह गुड़ गरम है इसलिए स्वादिष्ट है।’

यह सुनकर राजा कृष्णदेव राय मुस्कुरा दिए। पुरोहित अब भी चुप था

(समाप्त)



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