राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास

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ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन देशों के बीच सौहार्द और भाईचारा स्थापित करने के लिए राष्ट्रकुल खेलों की शुरुआत हुई थी। 1930 से अब तक 18 बार यह आयोजन विभिन्ना देशों में आयोजित हो रहा है। भारत में 19वाँ संस्करण तीन से 14 अक्टूबर तक खेला जाएगा। इसमें 73 देशों के चार हजार से अधिक एथलीट दांव पर लगे 829 पदकों के लिए अपना खेल कौशल दिखाने मैदान में उतरेंगे। राष्ट्रकुल का अब तक का सफर चार हिस्सों में बंटा हुआ है। यह अलग-अलग नामों के साथ आयोजित होता रहा। कुछ कारणों से यह खेल स्थागित भी हुए है।

ब्रिटिश एम्पायर गेम्स 1930-50 : शूरू में राष्ट्रमंडल खेल इसी नाम से अस्तित्व में आया। इसकी शुरुआत 1930 में कनाडा के हेमिल्टन में हुई। इसमें शामिल छह खेलों में 11 देशों से कुल 400 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसके बाद 1934 में लंदन में और 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ये खेल आयोजित हुई। द्व‍ितीय विश्व युद्ध के बाद कई सालों तक ये खेल स्थगित रहे और 1950 से न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर से दोबारा इनका आयोजन शुरू हुआ।
ब्रिटिश इंपायर व कॉमनवेल्थ गेम्स 1954-66: कनाडा के वेंकुवर में 1954 में आयोजित हुए पाँचवें राष्ट्रकुल खेल इसी नाम से आयोजित हुए। 1958 में वेल्स के कॉर्डिफ में, 1962 ऑस्ट्रेलिया के पर्थ व जमैका के किंग्सटन में 1966 में इसका आयोजन हुआ। इसकी लोकप्रियता भी बढ़ती रही और भाग लेने वाले देशों व खिलाड़ियों की संख्या में भी इजाफा होता रहा।
ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स 1970-74: तीसरी बार इन खेलों के नाम में परिवर्तन हुआ। इस दफा 1970 में स्काटलैंड के एडिनवर्ग में खेले गए खेलों को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना गया। इसी नाम से न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 1974 में भी इसका आयोजन हुआ।


कॉमनवेल्थ गेम्स 1978-2010: 1978 में कनाडा के एडमंटन से आयोजित हुए खेल कॉमनवेल्थ के नाम से प्रारंभ हुए। इस तरह चौथी बार इसके नाम में परिवर्तन हुआ। कनाडा के बाद 1982 में ब्रिसबेन, 1986 में एडिनबर्ग, 1990 में ऑकलैंड, 1994 में विक्टोरिया, 1998 में कुआलालंपुर, 2002 मैनचेस्टर, 2006 में मेलबोर्न में इसका आयोजन हो चुका है। अब तक इसी नाम से आठ बार इसका आयोजन हो चुका है।
दिल्ली में आयोजित हो रहा खेल भी इसी नाम से खेला जा रहा है। राष्ट्रकुल खेलों में पहली बार विवाद का साया 1978 में दिखाई दिया। न्यूजीलैंड द्वारा दक्षिण अफ्रीका से खेल को लेकर करार किया था, इससे नाइजीरिया नाराज हो गया था और उसने सबसे पहले इन खेलों का बहिष्कार किया। इसके बाद 1986 राष्ट्रकुल खेल में महज 26 देशों ने अपनी टीमें भेजी। इसका कारण इंग्लैंड की थेचर सरकार के व्यवहार व दक्षिण अफ्रीका से किए गए समझोते थे, इस बार अफ्रीका, एशिया व केरेबियन देशो के 59 में से 32 देशों ने इसका विरोध कर टूर्नामेंट का बहिष्कार किया था।
दक्षिण अफ्रीका के कारण 1974, 1982 व 1990 में भी इसका असर दिखा है। राष्ट्रकुल खेलों के 80 साल के इतिहास में 18 संस्करण आयोजित हो चुके है। इसमें अब तक 90 से अधिक देश भाग ले चुके हैं।

 

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