सिंहासन बत्तीसी : तेईसवीं पुतली धर्मवती की कहानी

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गड़रिया उलझन में पड़ गया। उसकी समझ में नहीं आया कि महाराज एक मांसभक्षी प्राणी को शाकाहारी बनाने पर क्यों तुले हैं? वह घर लौट आया। शावक जो कि अब जवान होने लगा था, सारा दिन बकरियों के साथ रहता और दूध पीता। कभी-कभी बहुत अधिक भूख लगने पर घास-पत्तियां भी खा लेता।

अन्य बकरियों की तरह जब शाम में उसे दरबे की तरफ हांका जाता तो चुपचाप सर झुकाए बढ़ जाता तथा बन्द होने पर कोई प्रतिरोध नहीं करता। एक दिन जब वह अन्य बकरियों के साथ चर रहा था तो पिंजरे में बन्द एक सिंह को लाया गया।

सिंह को देखते ही सारी बकरियां डरकर भागने लगीं तो वह भी उनके साथ दुम दबाकर भाग गया। उसके बाद राजा ने गड़रिए को उसे स्वतंत्र रूप से रखने को कहा। भूख लगने पर उसने खरगोश का शिकार किया और अपनी भूख मिटाई।

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