शेयर बाजारों में तकनीकी सुधार की संभावना

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
अमेर‍िका के ऋण बाजार की स्थिति को लेकर उत्पन्न गहरी चिंता ने देश के शेयर बाजारों में बीते सप्ताह ब्रेक लगा दिया। मुनाफावसूली के जोर के बीच आगामी हफ्ते भी इस सिलसिले के बने रहने की आशंका है।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तकनीकी सुधार की गुंजाइश है।

दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब केपीटल मार्केट्स के प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल की राय में आगामी सप्ताह अमेर‍िका समेत अन्य वैश्विक बाजारों की स्थिति को देखते हुए मुनाफावसूली का जोर रहने की संभावना है। उनका कहना है कि बाजार में तकनीकी सुधार की अधिक उम्मीद नजर आ रही है।
उधर सभी उम्मीदों के विपरीत बीते सप्ताह देश के शेयर बाजारों पर अमेरिका के ऋण बाजार की स्थिति भारी पड़ी। वैश्विक शेयर बाजारों की तरह यहाँ भी शेयर बाजार टूट गए।

बीएसई में पाँचों कारोबारी दिवसों में गिरावट रही। दीवाली के शुभ मुहूर्त पर पिछले सात वर्षों के दौरान पहली बार सेंसेक्स नीचे आया। इससे पहले सम्वत 2063 की समाप्ति पर भी शेयर बाजार बुरी तरह टूटे।
सेबी के पार्टिसिपेटरी नोट्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले के बाद से विदेशी संस्थान बाजार में बिकवाल नजर आ रहे हैं। 17 अक्टूबर को आए इस प्रस्ताव के बाद से विदेशी संस्थानों ने करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपए का निवेश निकाल लिया है।

गत सप्ताह पाँचों कारोबारी दिवसों में बिकवाली का जोर रहने से बाजार निरंतर टूटते रहे। सोमवार को 385.45 अंक टूट सेंसेक्स दीवाली के मूहुर्त कारोबार में भी इससे ऊबर नहीं पाया। मुहूर्त कारोबार में सेंसेक्स में 151.33 अंक और निफ्टी में 35.50 अंक का नुकसान हुआ।
अमरीकी ऋण बाजार की स्थिति को देखते हुए बीते सप्ताह बैंकिग क्षेत्र के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा। उधर रुपए की मजबूती ने सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर असर दिखाया।

अमेरिकी की अर्थव्यवस्था की मंद गति को देखते हुए भी देश से सॉफ्टवेअर का निर्यात करने वाली सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर दबाव में है क्योंकि इनकी आय का एक बड़ा हिस्सा अमेर‍िकी बाजार से आता है।


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