पाँच करोड़ शामिल होंगे महाकुंभ में

देहरादून (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 31 मई 2009 (15:51 IST)
पहली बार आयोजित होने वाले में सैकड़ों खुफिया कैमरों की निगेहबानी में करीब पाँच करोड़ लोग अगले वर्ष की शुरूआत में स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे।

राज्य में महाकुंभ के लिए पिछले करीब दो वर्षों से तैयारी का सिलसिला जारी है और इसके लिए करीब साढे तीन अरब रुपए का आवंटन किया जा चुका है।

महाकुंभ की तैयारियों से जुडे अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा, प्रकाश, पेयजल, सफाई और स्वास्थ्य के लिए ही कुल 88 करोड़ रुपए आवंटित किए गए जिन पर युदधस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
महाकुंभ के दौरान चाकचौबंद व्यवस्था के लिए 130 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले मेला परिसर में लोगों पर निगरानी रखने के लिए करीब 100 खुफिया कैमरे लगाये जाने की योजना है, जिसकी निगरानी करने के लिए एक विशाल नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा, जहाँ बैठकर आला अधिकारी पूरे मेले के संचालन पर निगाह रखेंगे।

इस दौरान ऐसी योजना बनाई गई है कि मेले में कोई भी असामाजिक या उपद्रवी तत्व जैसे ही प्रवेश करेगा, कैमरे के माध्यम से उसकी गतिविधि पर नजर लगातार रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उस व्यक्ति की जाँच पड़ताल भी की जा सकेगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि महाकुंभ के दौरान मुख्य स्नान केन्द्र हर की पौड़ी, चंडीघाट, वीआईपी घाट, तथा आसपास के इलाकों में करीब साठ कैमरे लगाए जाएँगे, जो लगातार चौबीसों घंटे स्नान प्रक्रिया पर निगाह रखेंगे।

इसके लिए उन केन्द्रों पर बड़-बडे़ टावर बनाए जाएँगे और उन टावरों पर वीडियो के तकनीकी विश्लेषकों को भी तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में वीडियो का विश्लेषण कर संदिग्ध व्यक्ति को दबोचा जा सके।
सूत्रों के अनुसार हर की पैडी के अलावा ऋषिकेश, मुनि की रेती, हरिद्वार शहर, ज्वालापुर और रुड़की के इलाकों में भी कैमरे लगाए जाएँगे। कैमरे इस तरह लगाये जाएँगे ताकि मेला क्षेत्र में प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति कैमरे में कैद हो जाये। इससे महाकुंभ प्रशासन हर व्यक्ति का हुलिया रखने में कामयाब हो सकेगा।

मेला क्षेत्र में प्रवेश करने वाले मैदानी इलाकों के साथ साथ देहरादून और रिषिकेश से जाने वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी इन कैमरों को स्थापित किया जाएगा। स्थिति यह बनाई जाएगी कि किसी भी रास्ते और कहीं से भी प्रवेश करने वाला व्यक्ति एक नहीं कई बार कैमरे की निगाह से गुजरेगा जिससे उसका पूरा हुलिया रिकॅर्ड होता रहेगा।
सूत्रों के अनुसार कुंभ क्षेत्र में पहले से ही कुछ कैमरे प्रयोग के तौर पर लगाए जा चुके हैं और इनके रिकॉर्डो का विश्लेषण करने से उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।

 

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