अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो-सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
अल्संख्यकों को सताए जाने की इजाजत नहीं देगा। अगर उड़ीसा सरकार राज्य में रह रहे ईसाइयों की सुरक्षा नहीं कर सकती तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।


यह दो टूक चेतावनी शीर्ष न्यायालय ने सोमवार को दी। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा हम एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हैं। हम अल्पसंख्यकों को सताए जाने की इजाजत नहीं दे सकते। पीठ में न्यायमूर्ति मार्केंडेय काटजू और न्यायमूर्ति पी. सतशिवम भी शामिल हैं।
पीठ ने विहिप नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद के खिलाफ हिंसा पर काबू के लिए कथित तौर पर देर से कदम उठाने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की।

पीठ ने कहा अल्पसंख्यक समुदाय की रक्षा करना राज्य सरकार का कर्तव्य है। इससे पहले वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने कहा उड़ीसा सरकार ने अदालत के आदेशों का अनुसरण किया है।


न्यायमूर्ति काटजू ने कहा हम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार नहीं स्वीकार करेंगे। अगर राज्य सरकार उनकी सुरक्षा करने में नाकामयाब है तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा देश में कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित नहीं होना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत ने अक्टूबर में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि दंगा प्रभावित क्षेत्रों में क्रिसमस के मद्देनजर दिसंबर के अंत तक अर्द्धसैनिक बल तैनात रहें। न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा कि केंद्रीय बलों को हटाने के संबंध में वह कोई भी एकतरफा फैसला नहीं ले और इस संबंध में कोई भी फैसला केंद्र के साथ समन्वय में होना चाहिए।
यह सुनवाई कटक के आर्कबिशप राफेल चीनाथ की याचिका पर हो रही थी। उन्होंने क्षतिग्रस्त चर्चों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को लेकर असंतोष व्यक्त किया था।

उनके वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा चर्चों की मरम्मत के लिए घोषित मुआवजा काफी कम है। मुआवजे से संबंधित दलीलों पर वेणुगोपाल ने कहा कि जिन मामलों में भूमि को लेकर विवाद है, वहाँ मुआवजा स्थगित रखा गया है।



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