फेसबुक और गूगल को चेतावनी

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 12 जनवरी 2012 (23:49 IST)
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल नेटवर्किंग साइट इंडिया और सर्च इंजन इंडिया को चेतावनी दी कि अगर वे अपने वेब पेज से आपत्तिजनक सामग्री नहीं हटाते हैं और उनको रोकने का तरीका अपनाने में विफल रहते हैं तो चीन की तरह वेबसाइटों को ‘ब्लॉक’ किया जा सकता है।
फेसबुक और गूगल इंडिया को चेतावनी देते हुए न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा, ‘चीन की तरह हम भी ऐसे सभी वेबसाइटों को ब्लॉक कर देंगे।’ उन्होंने इन साइटों से ‘हिंसक एवं आपत्तिजनक’ सामग्री को वेब पेज से हटाने और ऐसा करने से रोकने का तरीका विकसित करने को कहा।

मजिस्ट्रेट की अदालत में इन दोनों वेबसाइट के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने का न्यायमूर्ति कैत ने समर्थन नहीं किया। बहरहाल वे वकीलों की इस याचिका से सहमत थे कि कल निचली अदालत में वे प्रभावी सुनवाई के लिये दबाव नहीं बनाएंगे।
गूगल इंडिया की ओर से उपस्थित होते हुए पूर्व अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ‘आपत्तिजनक, अश्लील और अपमाजनक’ लेखों एवं अन्य सामग्रियों को लगाने से न तो रोका जा सकता है और न ही उनकी निगरानी की जा सकती है।

उन्होंने कहा इसमें मानव हस्तक्षेप संभव नहीं है और ऐसी घटनाओं को रोकना सुसंगत नहीं है। दुनिया में अरबों लोग वेबसाइट पर अपना लेख लगाते हैं। हां, वे अपमानजनक, अश्लील हो सकते हैं लेकिन उन्हें रोका नहीं जा सकता।
रोहतगी ने गूगल इंडिया और अमेरिका की कंपनी गूगल इंक के बीच अंतर बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा अमेरिकी कंपनी गूगल इंक सेवा प्रदाता है न कि मैं (गूगल इंडिया) और इसलिए अपनी होल्डिंग कंपनी के काम के लिये हम जिम्मेदार नहीं हैं। यह आपराधिक मामला है इसलिए उस कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जिसकी कोई भूमिका नहीं है। रोहतगी ने कहा कि गूगल इंडिया सेवा प्रदाता नहीं है और यह गूगल इंक की सहायक कंपनी है और अमेरिकी की अपनी कंपनी से यह अलग है।
उन्होंने कहा गूगल इंडिया, गूगल इंक की सहयोगी कंपनी है और इसकी अलग कानूनी पहचान है। यह अपनी होल्डिंग कंपनी के कार्यों एवं अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि गूगल इंक को तीसरे पक्ष के कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जो वेबसाइट का उपयोग ‘अश्लील एवं आपत्तिजनक’ सामग्री लगाने में करते हैं।
उन्होंने कहा हम अरबों दिमाग को नियंत्रित नहीं कर सकते। कुछ लोग पुराने विचार के हैं, कुछ लोग उदारवादी हैं और कुछ लोग वेब पेज पर आपत्तिजनक एवं निंदनीय लेख लिखते हैं। उनको हटाने की प्रक्रिया है। (भाषा)

 

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