देवउठनी एकादशी : शुभ व मांगलिक मुहूर्त आरंभ

गुरु बना रहा है शुभ मुहूर्त के योग

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6 नवंबर, रविवार को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में देवउठनी एकादशी होने से मांगलिक कार्यों के लिए शुभ योग लेकर आया है। गुरु प्रधान नक्षत्र होने और इसके मीन राशि में होने से गुरु कारक योग का निर्माण कर रहा है। इसे विष्णु स्वरूप माना जाता है, इसलिए यह एक शुभ योग बन रहा है। दिसंबर में केवल चार तारीख का विवाह का मुहूर्त है। 11 मार्च तक विवाह और मांगलिक कार्य के लिए लोगों को कई शुभ मुहूर्त भी मिलेंगे।
इसके बारे में ज्योतिषाचार्य दत्तात्रेय होस्करे ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 नवंबर को है। इसे देवउठनी एकादशी के अलावा प्रबोधनी एकादशी भी कहते हैं।

11 जुलाई को देवशयनी एकादशी को देव सो गए थे और चार्तुमास शुरू हुआ था। इस कारण सभी मांगलिक कार्य रुक गए थे। उन्होंने बताया कि देवउठनी एकादशी व्रत करने वाली माताओं के द्वारा शाम के समय की जाने वाली पूजा के लिए कई मुहूर्त मिलेंगे।
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सालिग्राम-तुलसी विवाह होगा उन्नति कारक : दत्तात्रेय के अनुसार इस बार का चौघडिया उपासकों के लिए उत्तम फलकारी होगा। शुभ मुहूर्त में शाम 5.39 से 7.13 तक पूजा की जा सकती है। इसके बाद अमृत लग्न में 7.13 से 8.48 तक साधक भगवान विष्णु से आशीष ले सकते हैं। चर का मुहूर्त 8.84 से 10.23 तक पूजा के लिए मिलेगा। इस समय सालिग्राम और तुलसी का विवाह करना विवाह कारक होगा और परिवार के लिए उन्नति कारक रहेगा।
नवंबर से मार्च तक मुहूर्त : विवाह के लिए इस बार नवंबर माह में 18, 19, 21, 22 और 29 को शुभ मुहूर्त मिलेगा। इसके बाद 4 दिसंबर को माह भर में शादी के लिए एक ही मुहूर्त बन रहा है।

जनवरी 2012 में तिथियों की भरमार रहेगी। 15, 16, 17, 18, 19, 27 और 28 को विवाह के लिए उत्तम फलकारी योग बन रहे हैं। वहीं फरवरी में 8, 10, 11, 17, 24 और 25 को भी लोग फेरे ले सकते हैं। इसके बाद मार्च में 9, 10 और 11 को मात्र तीन मुहूर्त विवाह के लिए बन रहे हैं और अप्रैल में विवाह के लिए एक भी मुहूर्त नहीं है।

 

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