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Last Modified: शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 (11:51 IST)

अक्षय तृतीया के 6 अनसुने फैक्ट्स: क्यों इस दिन किया हर काम होता है सफल

Akshaya Tritiya kalash
Akshaya Tritiya 2026: शास्त्रों में अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं। इस बार अक्षय तृतीया तिथि 19 और 20 अप्रैल को रहेगी। इस दिन की खास 6 बातें जानिए।
 

1. तिथि का आध्यात्मिक व पौराणिक महत्व

युगों का आरंभ: इसे 'कृतयुगादि' तिथि कहा जाता है। सतयुग, त्रेता और कलयुग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था, जबकि द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ।
ईश्वरीय अवतार: इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम और ब्रह्मा के पुत्र अक्षय कुमार का प्राकट्य हुआ था।
पावन अवतरण: इसी दिन भगवान विष्णु के चरणों से गंगा जी का धरती पर अवतरण हुआ था।
धार्मिक मान्यता: वैशाख मास की इस तिथि को शास्त्रों में वेदों और गंगा के समान ही श्रेष्ठ व अद्वितीय माना गया है।
 

2. शुभ कार्य और 'स्वयंसिद्ध' मुहूर्त

अबूझ मुहूर्त: इसे 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' माना जाता है, जिसमें पंचांग देखे बिना विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार आरंभ या नए उद्योग जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
ग्रहों की स्थिति: इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं, जो इसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत ऊर्जावान बनाता है।
निवेश व खरीदारी: वाहन, आभूषण, भूमि, शेयर मार्केट या रियल एस्टेट में निवेश के लिए लोग इसे सबसे सफल दिन मानते हैं।
 

3. दान की महिमा और वैज्ञानिक आधार

अनंत फल: इस दिन किए गए दान को 'अक्षय' कहा गया है, यानी इसका फल कभी समाप्त नहीं होता और यह अगले जन्मों तक सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
क्या दान करें: सामर्थ्य अनुसार जल, अनाज, गन्ना, दही, सत्तू, फल, सुराही, पंखा और वस्त्रों का दान करना चाहिए। जौ का दान सोने के दान के समान फलदायी माना गया है।
ऊर्जा का रूपांतरण: दान को दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने वाला और ऊर्जा के रूपांतरण का वैज्ञानिक जरिया माना गया है। इससे पापों का बोझ हल्का होता है।
 

4. पूजा-विधि और आध्यात्मिक नियम

दिनचर्या: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान, जप, स्वाध्याय और विष्णु आराधना करना शुभ होता है। भगवान विष्णु को श्वेत पुष्पों से पूजना कल्याणकारी है।
विशेष पाठ: लक्ष्मी प्राप्ति के लिए मंत्र, अनुष्ठान, ललिता सहस्त्रनाम व श्रीसूक्त का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है।
कर्मों की शुचिता: मान्यता है कि इस दिन किया गया अच्छा काम बरकत लाता है, लेकिन बुरा काम करने पर उसका परिणाम भी कई जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ता।
 

5. लोक विश्वास और ज्योतिषीय संयोग

रोहिणी नक्षत्र: यदि अक्षय तृतीया के दिन रोहिणी नक्षत्र हो, तो इसका महत्व हजारों गुना बढ़ जाता है।
कृषि ज्योतिष: किसानों में विश्वास है कि चंद्रमा के अस्त होते समय रोहिणी की स्थिति फसल की पैदावार का संकेत देती है।
विशेष दिन: यदि यह तिथि रविवार को पड़े, तो इसका पुण्य और भी बढ़ जाता है।
 

6. प्रमुख तीर्थ और दर्शन

बद्रीनारायण धाम: इसी पावन तिथि पर भगवान बद्रीनाथ के कपाट खोले जाते हैं।
बांके बिहारी दर्शन: वृंदावन में श्री बांके बिहारी जी के चरणों के दर्शन वर्ष में केवल एक बार इसी दिन होते हैं।
विशेष विचार: शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया केवल भौतिक वस्तुएं खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि अपनी योग्यता निखारने, दान करने और मनुष्य धर्म का पालन करने का दिन है।
 
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
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