टीम अण्णा से भाजपा भी हुई खफा

नई दिल्ली| Naidunia| पुनः संशोधित मंगलवार, 27 मार्च 2012 (01:24 IST)
सांसदों को चोर,लुटेरा और बलात्कारी बता रही टीम अण्णा से अब भाजपा भी खफा हो रही है। भाजपा को भी लग रहा है कि टीम अण्णा के कुछ सदस्य जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं वह संसद और लोकंतत्र के हित में नहीं है। भाजपा का यह बदला हुआ रूप सोमवार को लोकसभा में भी दिखाई दिया जब भाजपा ने भी टीम अण्णा के सदस्यों की बयानबाजी को अमर्यादित बताया।


भाजपा पर यह आरोप लगता रहा है कि भाजपा सहित समूचा संघ परिवार अण्णा के आंदोलन को समर्थन कर रहा है लेकिन इस बार संसद के बाहर जहां अण्णा के जंतर मंतर धरने में संघ के कार्यकर्ता नजर नहीं आए वहीं दूसरी तरफ संसद के भीतर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने टीम अण्णा की ओर से संसद सदस्यों के प्रति की जा रही अमर्यादित भाषा पर कड़ी आपत्ति प्रकट की। गौरतलब है कि टीम अण्णा ने जंतर-मंतर पर धरने के दौरान इस बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार पर भी निशाना साधा। इस पर भाजपा ने टीम अण्णा पर निशाना साधने में देर नहीं लगाई।


लोकसभा में सुषमा स्वराज ने टीम अण्णा को इसलिए भी आड़े हाथों लिया क्योंकि टीम अण्णा के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर हुए धरने के दौरान जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव को लेकर भी अपशब्दों का प्रयोग किया था। शरद यादव भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकारी संयोजक भी हैं। इस बीच आज लोकसभा में उक्त मुद्दे पर एक स्वर से कड़ी आलोचना की गई और इस बात की छानबीन कराने की मांग की गई कि कहीं देश को अस्थिर करने के लिए कोई विदेशी ताकत इस आंदोलन के पीछे तो नहीं है। यह मामला विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उठाया और कहा कि टीम अण्णा की ओर से जिस तरह सांसदों के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया है उसकी सदन निंदा करता है। स्वराज ने टीम अण्णा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संसद पर हमला लोकतंत्र पर हमला है तथा लोकतंत्र के प्रति अनास्था फैलाना तानाशाही को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि लगता है कि टीम अण्णा के सदस्य भटक गए हैं। वे लोकपाल विधेयक संसद से पारित कराना चाहते हैं और उसके सदस्यों को अपमानित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद जैसी संस्थाएं टूट जाएंगी तो लोकतंत्र नहीं बचेगा।


गौरलतब है कि रामलीला पर अण्णा के अनशन के समय जब टीम अण्णा के कुछ वक्ताओं ने सांसदों के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी तो भाजपा उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का समर्थन नहीं किया था। आरोप था कि सांसदों के बारे में टीम अण्णा की सदस्य किरण बेदी और अभिनेता ओमपुरी ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। सपा,बसपा और कांग्रेस सहित कई दलों के सांसदों ने इन दोनों के खिलाफ दोनों सदनों में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया भी दिया लेकिन भाजपा के किसी भी सदस्य ने नोटिस नहीं दिया। इतना ही नहीं तब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शांता कुमार ने कहा था कि कुछ वक्ताओं द्वारा रामलीला मैदान से सांसदों के बारे में की गई टिप्पणी पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की आवश्यकता नहीं है।


रामलीला के अनशन से लेकर जंतर-मंतर पर इस बार हुए धरने के बीच कुछ ही माह का अंतर है लेकिन टीम अण्णा को लेकर अब संघ परिवार की भी सोच बदल रही है। इसकी एक बड़ी वजह ते यह है कि अण्णा के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को संघ ने अपना पूरा समर्थन दिया। संघ परिवार के कैडर ने अण्णा के आंदोलन में बढ़ -चढ़ कर भाग भी लिया पर टीम अण्णा, संघ से दूरी दिखाने में लगी रही। लिहाजा संघ ने भी हाथ पीछे खींच लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि रामलीला मैदान के बाद मुंबई हो या दिल्ली, संघ का कैडर अब पहले की तरह अण्णा के आंदोलन में दिखाई नहीं देता। फिलहाल संसद के प्रति अभद्र शब्दों का इस्तेमाल और भाजपा सरकारों पर भी टीम अण्णा के हमले से भाजपा में एक बड़ा वर्ग खफा है।


मनोज वर्मा
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