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#WebViral पुराने नोट बंद करने का असली कारण

पुनः संशोधित शनिवार, 12 नवंबर 2016 (16:48 IST)
प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी की 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की नीति को कालेधन की बाजार में वापसी के रूप में देखा जा रहा है लेकिन इस माले में एक नई थ्योरी भी सामने आई है। इस थ्योरी को बैंकों के डूबते कर्ज से जोड़ा गया है जो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही है।  
इसमें कहा गया है कि अगर आपको कहा जाए कि भारतीय बैंकों का डुबत लोन वर्तमान में 6,00,000 करोड रुपए है। अगर आपको यह भी कहा जाए कि पीएसयू बैंकों की हालत बहुत खराब है और उन्हें तुरंत ही काफी धन की आवश्यकता है तो क्या आप एक हज़ार और पांच सौ के पुराने नोट को बंद करने के फैसले को इन दोनों तथ्यों से जोड़ पाएंगे?  
 
अगर आपको यह भी कहा जाए कि कुछ हफ्ते पहले, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडी ने कहा था कि भारतीय बैंकों को 1.25 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। अगर आपको बताया जाए कि जुलाई 2016 में 13 पब्लिक सेक्टर बैंकों में 23,000 करोड़ रुपए लगाए हैं। 2015 में ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार पीएसयू बैंकों में 70,000 करोड़ का निवेश करेगी। 
 
इन सभी आकड़ों के आधार पर अगर आपको कहा जाए कि सरकार का नोट बंद करने का कदम इन बीमार पड़े बैंकों को पर्याप्त धन उपलब्ध कराना है ताकि उनकी उधार देने की क्षमता बढ़ सके तो?  500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने की घोषणा के बाद लोग अपनी गाढ़ी कमाई बैंकों में लौटाने के लिए जुट गए। सरकार ने कहा 2000 रुपए के नए नोट बाजार में लाए जाएंगे, जिससे बैंकों में पर्याप्त धन होगा और वे फिर से मजबूत होकर कारोबार कर सकेंगे।  सोशल मीडिया पर वायरल होती इस थ्योरी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सरकार का यह कदम बीमार बैंकों को नई ऊर्जा देने के लिए उठाया गया है। 
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