अरुण जेटली बजट में दे सकते हैं इस तरह की राहत...

नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली गुरुवार को आम चुनाव से पहले अंतिम पूर्ण पेश करेंगे। इस बार लोगों का ध्यान 'क्या सस्ता, क्या महंगा' से हटकर आयकर स्लैब में बदलाव पर रहेगा और वेतनभोगियों को उम्मीद है कि वित्तमंत्री इस बार उन पर मेहरबान हो सकते हैं।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के साथ ही अप्रत्यक्ष कर लगाने का काम के हाथों से निकल गया है और यह काम अब वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद करती है जिसमें सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के वित्तमंत्री सदस्य हैं। अब बजट में अप्रत्यक्ष कर को लेकर बहुत कुछ नहीं होगा, लेकिन सीमा शुल्क में बदलाव होने पर आयातित वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार का यह अंतिम पूर्ण बजट है। इसके साथ ही इस वर्ष आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सरकार के कृषि क्षेत्र और छोटे उद्यमों पर विशेष ध्यान देने की संभावना है क्योंकि वर्ष 2022 तक सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए सरकार कृषि क्षेत्र के लिए कुछ बड़ी घोषणा कर सकती है।

आपूर्ति से जुड़ी बाधाएं दूर की जा सकती हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रमों के लिए अधिक राशि आवंटित की जा सकती है। कृषि बीमा और सिंचाई कार्यों तथा सामाजिक सुरक्षा उपायों के लिए अधिक राशि दी जा सकती है। इसके साथ ही छोटे एवं मध्यम उद्यम पर सरकार अधिक ध्यान दे रही है क्योंकि ये सर्वाधिक रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्र हैं।

नोटबंदी और जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती और वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर फिलहाल विराम लगाने के आर्थिक सर्वेक्षण के सुझाव के मद्देनजर यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार वर्ष 2018-19 के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ा सकती है क्योंकि आम चुनाव से पहले लोककल्याणकारी कार्यों पर सरकारी व्यय बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

इस बार के बजट में जिन बातों पर ध्यान दिए जाने की संभावना है उनमें व्यक्तिगत आयकर, कृषि क्षेत्र, मनरेगा, ग्रामीण विकास, कृषि ऋण, कॉर्पोरेट कर, न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट), रेलवे, राजमार्ग और सरकारी कंपनियों में विनिवेश आदि शामिल हैं।

जेटली के पास वेतनभोगियों के साथ ही व्यक्तिगत करदाताओं को खुश करने का यह अंतिम मौका है। इसके मद्देनजर आयकर स्लैब में बदलाव कर करदाताओं, विशेषकर वेतनभागियों को बड़ी दी जा सकती है। चुनाव जीतने के बाद से अब तक इस सरकार ने कर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। अभी आयकर में छूट की सीमा ढाई लाख रुपए है जिसे बढ़ाकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपए किया जा सकता है। इस स्लैब में करीब साढ़े चार लाख करदाता है।

इसके साथ ही पांच प्रतिशत कर के दायरे में 10 लाख तक की आय आ सकती है। अभी पांच लाख रुपए से अधिक की आय पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपए से अधिक की आय पर 30 फीसदी कर देना पड़ता है। जेटली 10 लाख रुपए से अधिक की आय वर्ग के करदाताओं को भी बड़ी राहत दे सकते हैं और 25 लाख रुपए से अधिक की आय पर 30 फीसदी कर का प्रावधान कर सकते हैं।

इसके साथ ही सरकार आयकर कानून की धारा 80सी के तहत निवेश की सीमा को डेढ़ लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर सकती है जिससे व्यक्तिगत करदाताओं को वार्षिक ढाई हजार रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक की बचत होगी।

विश्लेषकों का कहना है कि इसी तरह से सरकार कॉर्पोरेट कर की दर 25 फीसदी से कम कर सकती है क्योंकि कर में दी गई छूटों को वह तर्कसंगत बना रही है। इसी तरह से न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) भी 18.5 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, रियलटी आदि क्षेत्रों से जुड़ी कुछ नीतिगत घोषणाएं बजट में की जा सकती हैं। इसका असर अप्रत्यक्ष कर पर भी पड़ सकता है।

सरकार सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में सुधार दिख रहा है। बजट में डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के भी उपाय किए जा सकते हैं। आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए विनिर्माण में तेजी लाने पर भी सरकार जोर दे सकती है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ ही रोजगार प्रदान करने वाले बड़े क्षेत्र भी हैं।

सरकारी व्यय और राजस्व घाटा के बीच संतुलन के उद्देश्य से जेटली अगले वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रख सकते हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 72,500 करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य रखा था। इसमें 46,500 करोड़ रुपए सरकारी उपक्रमों के विनिवेश से और 15,000 करोड़ रुपए रणनीतिक विनिवेश से जुटाए जाने थे। इसमें 22 जनवरी तक 55,560 करोड़ रुपए जुटाये जा चुके हैं। (वार्ता)


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