आतंकवाद को चुनौती देतीं ये जांबाज महिलाएं...


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कुछ स्थानों पर के बेहतर मुकाबले में महिला भागीदारी 
उत्तर पश्चिमी इराक में सिंजर के पहाड़ी क्षेत्रों में कुर्द सेना की महिला ब्रिगेड द्वारा इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से लड़ने की खबरें भी इस वर्ष सुर्खि‍यों में रहीं। इस कुर्द सेना में 15 हजार महिला सैनिक हैं, जो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर किसी भी तरह की सशस्त्र कार्रवाई के लिए हर समय तैयार रहती हैं।
 
> इनमें से ज्यादातर महिला सैनिकों की उम्र 18 से 25 साल है। इस्लामिक स्टेट के खि‍लाफ महिलाओं की भागीदारी के पीछे एक धारणा भी काम करती है। दरअसल, आईएस के लड़ाकों में यह आम धारणा है कि युद्ध में अगर किसी मर्द के हाथों मारे गए तो स्वर्ग में 72 वरजिन मिलेंगी, लेकिन अगर किसी महिला के हाथों मौत हुई तो एक भी वरजिन नसीब नहीं होगी। इसलिए आईएस के लड़ाके कुर्द सेना की महिला सैनिकों से बेहद खौफ खाते हैं। इस नजरिए से आतंकी संगठन आईएस के खि‍लाफ महिला सैनिकों का खड़ा होना एक महत्वपूर्ण कदम है। 
 
 
...और ये हैं आतंकवादियों की मददगार महिलाएं... देखें अगले पेज पर...

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