कहां-कहां मोर्चा खोल रखा है इस्लामिक आतंकवादियों ने?

Last Updated: बुधवार, 7 दिसंबर 2016 (12:18 IST)
चेचन्या : चेचन्या रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित गणराज्य है, जो मुख्‍यत: मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। स्थानीय अलगाववादियों और रूसी सैनिकों के बीच बरसों से जारी लड़ाई ने चेचन्या को बर्बाद कर दिया है। चेचन्या पिछले लगभग 200 सालों से रूस के लिए मुसीबत बना हुआ है। रूस ने लंबे और रक्तरंजित अभियान के बाद 1858 में चेचन्या में इमाम शमील के विद्रोह को कुचला था लेकिन इसका असर ज्यादा समय तक नहीं रहा। 
लगभग 60 साल बाद जब रूस में क्रांति हुई तो चेचन फिर रूस से अलग हो गए। यह आजादी कुछ ही समय तक बनी रही और 1922 में रूस ने फिर चेचन्या पर अधिकार कर लिया। दूसरे महायुद्ध के वक्त चेचन फिर रूस से अलग हो गए। लड़ाई थमते ही रूसी नेता स्टालिन ने चेचन अलगाववादियों पर दुश्मनों से सहयोग का आरोप लगाकर उन्हें साइबेरिया और मध्य एशियाई क्षेत्रों में निर्वासित कर दिया। 1957 मे ख्रुश्चेव जब सत्ता में आए तो चेचन अलगाववादी वापस आ पाए। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद चेचन्या के लोगों ने फिर से विद्रोह कर दिया। 1994 में रूस ने वहां सेना भेजी, मगर चेचन लोगों ने जोरदार विरोध किया जिसमें दोनों तरफ के लोग भारी संख्या में मारे गए।
 
अगस्त 1999 में चेचन विद्रोही पड़ोसी रूसी गणराज्य दागेस्तान चले गए और वहां एक मुस्लिम गुट के अलग राष्ट्र की घोषणा का समर्थन कर दिया, जो कि चेचन्या और दागेस्तान के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर बनाया जा रहा था, लेकिन तब तक रूस में व्लादीमिर पुतिन प्रधानमंत्री बन चुके थे और उनकी सरकार ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी। इसके तहत चेचन्या के लिए नए संविधान को मंजूरी दी गई और चेचन्या को और स्वायत्तता दी गई। मगर ये स्पष्ट कर दिया गया कि चेचन्या रूस का हिस्सा है, लेकिन चेचन्या के विद्रोही या आतंकवादी कहां मानने वाले थे इसलिए लड़ाई अभी जारी है और इस लड़ाई का कोई अंत नहीं। इससे चेचन्या के लोगों का ही नुकसान होता जाएगा।
 
लंदन के एक दिवसीय प्रवास के दौरान पुतिन ने स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम को चेचन्या के मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि यदि इस्लामी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को रोका नहीं गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों को चाहिए कि वे चेचन्या में इसका सामना करने के लिए मॉस्को का साथ दें। लेकिन लगता है कि वे अपनी मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी को नाराज नहीं करना चाहते। उन्होंने बल देकर यह भी स्पष्ट किया कि रूस को यद्यपि यह स्वीकार नहीं होगा कि उसके एक क्षेत्र से उसकी संप्रभुता को चुनौती देने वाले स्वर उभरें। रूस का लक्ष्य चेचन्या को गुलामी की जंजीरों में जकड़ना नहीं है, बल्कि इसके लोगों को इस्लामी चरमपंथियों और आतंकवादियों से मुक्त कराना है।

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