कहां-कहां मोर्चा खोल रखा है इस्लामिक आतंकवादियों ने?

Last Updated: बुधवार, 7 दिसंबर 2016 (12:18 IST)
: इसराइल और फिलिस्तीन के बीच सदियों से गाजा और यरुशलम पर कब्जे को लेकर लड़ाई जारी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसराइल से खदेड़े गए यहूदियों को पुन: इसराइल में बसाया गया और यह मुल्क उनके सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद आज तक यहूदियों की इस्लाम से जंग जारी है। 1948 में जब विभाजन हुआ तब इसराइल और फिलिस्तीन दो देश बने थे। गाजापट्टी, जो इजिप्ट के कब्जे में था और वेस्ट बैंक ये दोनों अलग-अलग हिस्से हैं, फिलिस्तीन का तब से ही संघर्ष चल रहा है।
यहूदी पश्चिम एशिया के उस इलाके में अपना हक जताते थे, जहां सदियों पहले यहूदी धर्म का जन्म हुआ था और जहां वे संख्‍या में बहुल थे। यही वो जमीन थी, जहां ईसाइयत का जन्म हुआ। इस्लाम का उदय होने के बाद इस क्षेत्र पर उनका कब्जा हो गया। आज जिसे गाजा कहते हैं, यहूदियों के दावे वाले इसी इलाके में मध्यकाल में अरब फिलिस्तीनियों की आबादी बस चुकी थी। इस गाजा पट्टी पर अपने अधिकार को लेकर जंग के लिए हमास नामक आतंकवादी संगठन का उदय हुआ।
 
'हमास' का मतलब है 'हरकत उल मुकवामा अल इस्लामियास।' यह फिलिस्तीन का सामाजिक-राजनीतिक आतंकवादी संगठन है, जो मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में 1987 में स्थापित किया गया था। इस संगठन का इसराइल के खिलाफ है और इसका मकसद इसराइल से फिलिस्तीन की आजादी को सुरक्षित रखना है। इसे आत्मघाती हमलों के लिए जाना जाता है। इस आतंकवादी संगठन को इसराइली सरकार और नागरिकों के खिलाफ अपने अभियान में हिजबुल्लाह का समर्थन भी हासिल है।
 
हिजबुल्लाह ईरान और सीरिया समर्थित लेबनानी आतंकवादी संगठन है, जो 1982 के लेबनानी गृहयुद्ध से उभरा था। हालांकि इस संगठन को इसराइल और सुन्नी अरब देशों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। कहते हैं कि इस संगठन को लेबनान की 41 फीसदी जनसंख्या का समर्थन हासिल है। 

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