आपके जीवन को सही दिशा देंगे स्वामी विवेकानंद के ये 10 सुविचार

Vivekanand

* हमारा कर्तव्य हैं की हम हर उस व्यक्ति का होंसला बढ़ाए, जो अपने ऊंचे विचारों पर जीवन व्यतीत करने के लिए संग्रह कर रहा है।

* तुम किसी को दोष मत दो। अगर तुम अपने हाथ आगे बढ़ा कर किसी की मदद कर सकते हो तो करो, अगर नहीं कर सकते हो तो अपने हाथ बांधकर खड़े रहो। अपने वालों को शुभकामनाएं दो और उन्हें उनके रास्ते जाने दो..। आप दोष देने वाले कोई नहीं होते है।

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कभी भी यह मत सोचो की तुम्हारे लिए, तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है। यह सोच ही सबसे ज्यादा दुखदायी है।
अगर कोई पाप हैं.., तो वो सिर्फ और सिर्फ अपने आपको या दूसरों को कमजोर मानना हैं।

* हमारा कर्तव्य हैं की हम हर उस व्यक्ति का होंसला बढ़ाए, जो अपने ऊंचे विचारों पर जीवन व्यतीत करने के लिए संग्रह कर रहा है।

* तुम्हे अंदर से सीखना हैं सबकुछ..। तुम्हे कोई नहीं पढ़ा सकता.., कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। अगर यह सब कोई सिखा सकता हैं तो यह केवल आपकी आत्मा हैं..।

* ईर्ष्या तथा अंहकार को दूर कर दो, संगठित होकर दूसरों के लिए कार्य करना सीखो।

* सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए.., पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए।

* अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है, जब तक जीना, तब तक सीखना यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

* यही दुनिया है! यदि तुम किसी का उपकार करो, तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे, किन्तु ज्यों ही तुम उस कार्य को बंद कर दो, वे तुरंत (ईश्वर न करे) तुम्हें बदमाश प्रमाणित करने में नहीं हिचकिचाएंगे।

* भाग्य बहादुर और कर्मठ व्यक्ति का ही साथ देता है। पीछे मुडकर मत देखो आगे, अपार शक्ति, अपरिमित उत्साह, अमित साहस और धैर्य से ही महत्वपूर्ण कार्य निष्पन्न किए जा सकते हैं।

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