शेयर बाजार में हड़कंप, निवेशकों को लगा लाखों करोड़ों रुपए का चूना

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पुनः संशोधित शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018 (16:24 IST)
मुंबई। वैश्विक दबाव के साथ नकारात्मक आर्थिक आंकड़े, भारतीय मुद्रा के 74 रुपए प्रति डॉलर के स्तर से नीचे लुढ़कने और कच्चे तेल की कीमतों में उफान के कारण में लगातार चौथे दिन शुक्रवार को कारोबारी माहौल पूरी तरह नकारात्मक बना रहा। निवेशक इसके साथ ही रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति द्वारा नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से भी हतोत्साहित रहे।

तेल एवं गैस, ऊर्जा और पीएसयू समूह में हुई भारी बिकवाली के दबाव में बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 792.17 अंक का तेज गोता लगाकर 35,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से लुढ़कता हुआ 34,376.99 अंक पर और एनएसई का निफ्टी 282.80 अंक टूटकर 10,316.45 अंक पर बंद हुआ। दिग्गज कंपनियों की तरह छोटी और मझोली कंपनियों को भी बिकवाली के कारण काफी नुकसान हुआ।

बीएसई का मिडकैप 2.70 प्रतिशत यानी 388.72 अंक फिसलकर 14,003.81 अंक पर और स्मॉलकैप 2.02 प्रतिशत यानी 285.90 अंक टूटकर 13,840.26 अंक पर बंद हुआ। ईंधन की कीमतों में रही तेजी के कारण लागत बढ़ने और मजबूत डॉलर की वजह से आयात महंगा होने से सितंबर में देश के सेवा क्षेत्र की रफ्तार सुस्त पड़ गई। निक्की इंडिया द्वारा जारी सेवा कारोबार गतिविधि सूचकांक के मुताबिक, यह अगस्त के 51.5 से गिरकर सितंबर में 50.9 पर आ गया।

इस बीच लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा भी बढ़त बनाता हुआ 85 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को पेट्रोल-डीजल के उत्पाद शुल्क में डेढ़ रुपए प्रति लीटर की कटौती करने और तेल कंपनियों द्वारा कीमत में एक रुपए प्रति लीटर कमी करने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद से तेल एवं एवं गैस समूह और ऊर्जा समूह में तेज गिरावट आई।

इसके बाद आज अपराह्न रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक के नतीजे भी निवेशकों को हतोत्साहित करने वाले रहे। नीतिगत दरों को यथावत रखने की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेज रफ्तार से बिकवाली शुरू हो गई और भारतीय मुद्रा पहली बार 74 रुपए के पार 74.23 रुपए प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई। (वार्ता)


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