विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने एटीपी को पत्र लिखकर अमेरिका के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी आंद्रे अगासी के मामले की जाँच करने को कहा है, जिन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने 1997 में प्रतिबंधित पदार्थ क्रिस्टल मेथ लिया था।
वाडा के महानिदेशक डेविड होमैन ने एटीपी को लिखे पत्र के बारे में अधिक कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि इसकी उचित प्रतिक्रिया मिलेगी।
होमैन ने टेलीफोन पर कहा कि हमारा काम डोपिंग नहीं करने वाले एथलीटों का बचाव करना और यह सुनिश्चित करना है कि इस तरह की चीजें दोहरायी न जाएँ। अगर हम कोई कदम नहीं उठाएँगे तो कोई हमारा दरवाजा खटखटाएगा और कहेगा कि आप इस बारे में क्या रहे हैं।
जल्द ही रिलीज होने वाली अपनी आत्मकथा ‘ओपन’ में अगासी ने लिखा है कि उन्होंने क्रिस्टल मेथ लिया था और डोपिंग टेस्ट में विफल होने पर निलंबन से बचने के लिए पुरुष टेनिस की संचालन संस्था से झूठ बोला।
होमैन ने कहा कि यह पत्र विशेष तौर पर एटीपी को लिखा गया है लेकिन इसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ को दी गई है।
एटीपी ने ई-मेल पर एक बयान में कहा कि एटीपी पुष्टि करता है कि उसे वाडा का पत्र मिला है। जब हम जवाब देंगे तो सीधे वाडा को देंगे और ऐसा मीडिया के जरिये नहीं होगा। इसमें कहा गया है, एटीपी अपनी उस नीति को भी दोहराना चाहता है जिसके मुताबिक डोपिंग रोधी उल्लंघन का पता नहीं चलने तक डोपिंग रोधी नतीजे पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
इससे पहले अगासी की किताब के अंशों से खुलासा हुआ था कि इस आठ बार के ग्रैंड स्लैम चैम्पियन ने स्वीकार किया कि उसने 1997 में क्रिस्टल मेथ लिया और इसी साल ड्रग टेस्ट में पाजीटिव पाए जाने के बाद भी उन्होंने निलंबन से बचने का रास्ता निकाल लिया।
अन्य टेनिस और डोपिंग अधिकारियों ने शुरूआत में इस मामले में निराशा जताई थी लेकिन उन्होंने साथ ही कहा था कि आठ साल की समय सीमा गुजर जाने के कारण प्रतिबंध के लिए काफी देर हो गई है। होमैन ने हालाँकि एटीपी से इस मामले पर और करीब से गौर करने और इस बारे में वाडा को सूचित करने की अपील की है।