आर्थिक अभावों और बिरादरी की आलोचना झेलने के बावजूद हॉकी के लिए अपना जुनून बरकरार रखते हुए कजान में चैम्पियंस हॉकी चैलेंज टूर्नामेंट में भारत की खिताबी जीत की सूत्रधार बनीं रानी देवी को मलाल है कि बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया।
हरियाणा के शाहबाद में बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली रानी के पिता ठेलागाड़ी चलाते हैं जबकि भाई कारपेंटर हैं। पिछले साल राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाने वाली रानी ने कजान में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर सभी को चौंका दिया।
रानी ने कहा कि मेरा एक ही सपना है कि मैं ऐसी खिलाड़ी बनूँ, जिस पर परिवार और देश को नाज हो। मेरी राह आसान नहीं है लेकिन मैं इस पर पूरी शिद्दत से चलूँगी। उन्होंने बताया कि कजान में उनका बेहतरीन प्रदर्शन भारत में अनदेखा ही रह गया और कोई उनसे हालचाल पूछने तक नहीं आया।
यह पूछने पर कि क्या उन्हें कोई नकद पुरस्कार मिला? इस फारवर्ड खिलाड़ी ने कहा कि पुरस्कार मिलना तो दूर की बात रही, कोई यह पूछने नहीं आया कि हमने कौनसी उपलब्धि पाई। कोच बलदेवसिंह, एमके कौशिक और कप्तान सुरिंदर कौर के अलावा आज तक किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की। यदि मदद मिलती तो मैं अपने खेल में और सुधार कर सकती। हॉकी खेलने की प्रेरणा के बारे में पूछने पर रानी ने कहा कि स्कूल में अपने सीनियर को देखकर मैने भी हॉकी खेलना शुरू की। मेरे पास न तो स्टिक थी और न ही जूते। बाद में कोच बलदेव ने मुझे सामान दिया।
माता-पिता की प्रतिक्रिया के बारे में उन्होंने कहा कि मेरी जिद के आगे वे मान गए, लेकिन बिरादरी के लोगों और पड़ोसियों ने लड़की को हॉकी खेलने की अनुमति देने पर उनकी काफी आलोचना की, लेकिन अब वे ही लोग अपने बच्चों को मेरी मिसाल देते हैं।
सरकारी स्कूल में 11वीं की छात्रा रानी टूर्नामेंटों में इतनी व्यस्त रहीं कि स्कूल सिर्फ इम्तिहान देने ही जा सकीं। आर्थिक तंगी के चलते वे ट्यूशन भी नहीं ले पा रही थीं लेकिन उन्हें इसका मलाल नहीं और रोजाना अभ्यास के जरिये अपनी हॉकी में निखार लाना ही उनका लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि अब हमें अगस्त में बोस्टन (अमेरिका) में अंडर 21 विश्व कप खेलना है और मैं उसमें भी इसी प्रदर्शन को दोहराना चाहती हूँ। कजान से लौटने पर दिल्ली में टीम का अपेक्षित स्वागत नहीं होने का मलाल रानी को भी है और उनका मानना है कि जब तक क्रिकेट का खुमार देशवासियों पर से नहीं उतरेगा, हॉकी को उसका मुकाम नहीं मिल सकता।
उन्होंने कहा कि मुझे क्रिकेट और क्रिकेटर इसीलिए पसंद नहीं क्योंकि उनके चलते हॉकी को उसकी जगह नहीं मिल पा रही। पता नहीं कब लोग हमारी उपलब्धियों को भी उतनी ही तवज्जो देंगे। |