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राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी को खतरा नहीं
भारतीय ओलि‍म्पिक संघ ने मुंबई आतंकी हमले के कारण 2010 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की भारत की मेजबानी को लेकर उठाए जा रहे सवालों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस खेल महाकुंभ की सुरक्षा को लेकर वह पहले से ही सजग हैं और ताजा घटनाक्रम से इनके आयोजन पर किसी प्रकार असर नहीं पड़ेगा।

आईओए महासचिव रणधीरसिंह ने कहा कि मुंबई हादसा एक दुखद घटना है लेकिन जहाँ तक राष्ट्रमंडल खेलों का सवाल है तो इन खेलों के लिए पहले से ही भारी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया जा रहा है।

राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के अध्यक्ष माइकल हूपर के उस बयान पर जिसमें उन्होंने मुंबई हादसे जैसी खबरों पर चिंता व्यक्त की है सिंह ने कहा कि जिस तरह बीजिंग ओलि‍म्पि‍क खेलों के लिए कड़ी सुरक्षा की गई थी और जिस तरह की सुरक्षा 2012 लंदन ओलि‍म्पिक खेलों में होगी उसी स्तर की सुरक्षा दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान की जाएगी।

मुंबई में आतंकी हमले के बाद इंग्लैंड ने भारत दौरा बीच में ही रद्द कर दिया था। इसके बाद भारतीय उपमहाद्वीप की 2011 में होने वाले विश्वकप क्रिकेट की मेजबानी पर भी सवाल उठाए जाने लगे। इस बीच राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को लेकर भी विदेशी समाचार पत्रों में शंकाएँ जताई गई।

सीजीएफ अध्यक्ष हूपर की चिंता से यह मसला अधिक गरमा गया था। लंदन से प्रकाशित 'द टेलीग्राफ' के अनुसार हूपर ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है।

हम लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इन खेलों के दौरान सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और हम इस पर लगातार नजर रखे हुए है।

राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के उपाध्यक्ष रणधीरसिंह ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और हम कड़ी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए वचनबद्ध हैं।

सीजीएफ पहले ही इन खेलों के लिए यमुना के किनारे बनाए जा रहे खेल गाँव की तैयारियों को लेकर नाराजगी व्यक्त कर चुका है। उस समय भी उसने दिल्ली की मेजबानी को लेकर सवाल उठाए थे।

सीजीएफ के समन्वय समिति के अध्यक्ष ऑस्टिल सीले ने हाल ही दिल्ली में अपनी बैठक के बाद कहा था अगर खेल गाँव के स्थान में अब किसी प्रकार का परिवर्तन करने का प्रयास किया तो भारत से खेलों की मेजबानी छीनी भी जा सकती है।

गौरतलब है कि पर्यावरणविद ने दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करके कहा कि यमुना के इस स्थान पर खेल गाँव बनाए जाने से पर्यावरण को नुकसान होगा। राजधानी में 2010 में 3 से 14 अक्‍टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में करीब 70 देशों के पाँच हजार खिलाड़ी भारत आएँगे। इसके अलावा इन खेंलों को देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटकों के भारत आने की संभावना है।
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