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भारत में 100 खली पैदा हो सकते हैं-खली
डब्ल्यूडब्ल्यूई में भारत के इकलौते नुमाइंदे द ग्रेट खली का मानना है कि इस देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और यदि हमारे पहलवान कड़ी मेहनत करें तो एक क्या 100 खली यहाँ से निकल सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए दलीपसिंह राणा उर्फ खली ने 2006 में अमेरिका की मशहूर वर्ल्ड रेसलिंग इंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) में प्रवेश किया और अगले ही साल विश्व हैवीवेट चैम्पियन बनें।

बरसों बाद भारत दौरे पर आए 7 फुट 3 इंच लंबे 420 पाउंड वजन वाले खली यहाँ अपनी लोकप्रियता देख हैरान है। खली ने खास बातचीत में कहा कि मुझे अनुमान ही नहीं था कि भारत में, मैं इतना मशहूर हूँ। यहाँ मैं सड़क पर निकलता हूँ तो ट्रैफिक जाम हो जाता है। मुझे तो लगा था कि यहाँ क्रिकेटर और फिल्म स्टार ही मशहूर होते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि भारत से और भी पहलवान इस मुकाम तक पहुँचे। भारतीय कुश्ती के लिए मैं इतना जरूर कर सकता हूँ कि सारे सवालों का जवाब देकर सही रास्ता दिखा सकूँ। मैं कोई नेता तो नहीं कि भाषणबाजी करूँ।

बॉडी बिल्डिंग के रास्ते कुश्ती में उतरे खली 1999 में वर्क परमिट पर अमेरिका गए और ऑल प्रो. रेस्लिंग स्कूल में प्रवेश लिया। इसके बाद जापान के मशाहिरो चोनो के साथ उन्होंने न्यू जापान प्रो. रेस्लिंग में पदार्पण किया जो कुश्ती में एशिया की सबसे मशहूर पेशेवर कंपनी है।

पंजाब से अमेरिका तक के अपने सफर को संघर्षपूर्ण बताते हुए खली ने कहा कि मैं केवल 2 हजार रुपए लेकर अमेरिका गया था। वहाँ फिल्मों में भी काम किया, जिसके बाद मुझे डब्ल्यूडब्ल्यूई की पेशकश मिली और मेरा सपना पूरा हो गया। मैने यहाँ तक पहुँचने के लिए बहुत पापड़ बेले हैं।

उन्होंने बताया कि हिमाचल में तो हमारे गाँव में टीवी या केबल थी नहीं। पंजाब आकर हमने टीवी पर डब्ल्यूडब्ल्यूई देखना शुरू किया। मेरे साथियों ने मेरी बॉडी और मसल्स देखकर प्रोत्साहित किया और मैंने भी इसके लिए मेहनत शुरू कर दी।

डब्ल्यूडब्ल्यूई मुकाबलों में कितनी सच्चाई होती है यह पूछने पर खली ने कहा कि लोगों को यह भ्रम है कि हमारी लड़ाई नकली होती है लेकिन आप जो देखते हैं वह सभी सच होता है। पहलवानों की हड्डी टूट जाती है या लकवा तक मार जाता है।

अंडरटेकर, शान माइकल्स और बिग शो को पसंद करने वाले खली ने बताया कि रिंग के भीतर हिंसक लड़ाई के बावजूद पहलवानों में आपस में कोई बैर नहीं होता। उन्होंने कहा भारत और पाकिस्तान के क्रिकेटर भी मैदान पर लड़ते हैं लेकिन असल जिंदगी में दोस्त होते हैं। इसी तरह हम पहलवानों की भी दोस्ती होती है। सभी को पता है कि इस खेल में चोट लगती ही है।

डब्ल्यूडब्ल्यूई में डोपिंग के चलन को नकारते हुए खली ने कहा कि वहाँ काफी कड़े नियम हैं। हर हफ्ते डोपिंग टेस्ट होता है और कोई भी स्टेरायड लेगा तो बच नहीं सकता। अमेरिकी फुटबॉल के शौकीन खली को भारत छोड़ने से पहले क्रिकेट मैच देखने का भी चस्का था।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में तो क्रिकेट होता नहीं लेकिन हमें खबर जरूर रहती है। भारत में इन दिनों आईपीएल चल रहा है और इसके काफी चर्चे हैं। हैवीवेट पहलवान पलविंदरसिंह चीमा से मिली खुली चुनौती के बारे में खली ने कहा कि मैं किसी चुनौती की परवाह नहीं करता।

उन्हें चैलेंज करना ही है तो अपने हिन्दुस्तानी भाई को क्यों? अंडरटेकर को चैलेंज करें। मुझे तब चैलेंज करते, जब मैं उनके स्तर पर था।
उन्होंने कहा कि ये उन लोगों में से है जो ग्रेट खली को ग्रेट नहीं मानते। अगर मैं इनकी चुनौतियों को गंभीरता से लेने लगा तो डब्ल्यूडब्ल्यूई छोड़नी पड़ेगी। (भाषा)
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