तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शन के कारण युनान में ओलिंपिक मशाल प्रज्जवलित करने के लिए आयोजित पारंपरिक समारोह में सोमवार को खलल पैदा हुआ। उधर चीन ने मशाल को योजनानुसार एवरेस्ट चोटी तक ले जाने की शपथ ली।
तिब्बती आंदोलनकारियों ने ओलिंपिक मशाल रिले को अशांत हिमालयी क्षेत्र से नहीं ले जाने की बात कही थी। तिब्बत में गत 1989 के बाद से हुए अब तक के सबसे बड़े विद्रोह को कुचलने के लिए भारी संख्या में चीनी सैनिक वहाँ मौजूद हैं।
सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वादा किया है कि वह 2008 के ओलिंपिक समारोह के लिए मशाल दौड़ को निर्बाध तरीके से संपन्न कराएगा। चीन अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को सुधारने के लिए ओलिंपिक खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न कराना चाहता है।
कड़े सुरक्षा प्रबंध के बावजूद ओलंपिक मशाल प्रज्जवलित करने के लिए आयोजित समारोह के दौरान दो प्रदर्शनकारी युनान में प्राचीन ओलंपिया स्थित मैदान में घुस गए। इसका प्रसारण चीन के सरकारी टेलीविजन पर कुछ विलंब से किया गया।
मीडिया रपट के अनुसार बीजिंग ओलिंपिक आयोजन समिति के अध्यक्ष और बीजिंग कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव लियू छी जब भाषण दे रहे थे, तो एक व्यक्ति काला ध्वज और ओलिंपिक छल्लों के प्रतीक के तौर पर हथकड़ी लेकर उनके पीछे भागा। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान प्रसारण में व्यवधान उत्पन्न हो गया।
अधिकारियों ने एक तिब्बती प्रचारक और एक फोटोग्राफर को आयोजन स्थल के बाहर हिरासत में लिया। समारोह के दौरान समस्या पैदा होने की आशंका के मद्देनजर करीब एक हजार पुलिसकर्मियों को प्राचीन ओलंपिया में तैनात किया गया था।
मशाल 31 मार्च को बीजिंग पहुँचेगी। यह मशाल भारत समेत 20 देशों से गुजरेगी। तिब्बत स्थित माउंट एवरेस्ट चोटी पर मशाल मई में ले जाई जाएगी। ओलिंपिक खेल आठ अगस्त से शुरू होंगे।
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