वॉर्न की तरह ऑस्ट्रेलिया के एक अन्य खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट को भी कभी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने का मौका नहीं मिला। वह लंबे समय तक टीम के उप कप्तान रहे और उन्हें नियमित कप्तान के न खेलने पर ही यदाकदा टीम की अगुवाई का मौका मिला। आईपीएल में भी उनका भाग्य इसी तरह कप्तान बनने को लिखा था।
डेक्कन चार्जर्स के कप्तान वीवीएस लक्ष्मण जब घायल हो गए तो फिर उप कप्तान गिलक्रिस्ट ने चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ कमान संभाली और टीम को शानदार जीत दिलाई। यह सात मैच में टीम की दूसरी जीत थी।
मुंबई की कहानी भी लगभग ऐसी ही रही। सचिन तेंडुलकर ग्रोइन की चोट के कारण अब सातों मैच में नहीं खेल पाए हैं। मुंबई के लिए पहले तीन मैच में हरभजनसिंह ने कप्तानी की और इन तीनों में उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान शान पोलाक ने कमान संभाली और मुंबई अब दो मैच जीतकर अंक तालिका में पाँचवें स्थान पर पहुँच गया है।
अगर भारतीय खिलाड़ियों की कप्तानी की बात की जाए तो लक्ष्मण सबसे अधिक असफल कहे जाएँगे। उनकी कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स ने जो छह मैच खेले हैं, उनमें से पाँच में उसे हार का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ युवराजसिंह की कप्तानी में किंग्स इलेवन पंजाब ने सात में से पाँच मैच जीते हैं।
भारतीय एकदिवसीय टीम के कप्तान महेंद्रसिंह धोनी तब तक तो सफल रहे थे, जब तक उनकी टीम में ऑस्ट्रेलियाई मैथ्यू हेडन और माइकल हसी तथा न्यूजीलैंड के जैकब ओरम थे, लेकिन उसके बाद उनका भाग्य साथ नहीं दे रहा है। शुरुआती चरण के सात मैचों में से टीम ने पहले चार मैच जीते, लेकिन उसके बाद लगातार तीन मैच में उसे हार मिली।
कोलकाता नाइट राइडर्स भी सौरव गांगुली की कप्तानी का जलवा नहीं देख पाया है, जबकि बेंगलूर रायल चैलेंजर्स के राहुल द्रविड़ को शायद कप्तानी रास नहीं आ रही है। दिल्ली डेयर डेविल्स के वीरेंद्र सहवाग जरूर कप्तानी का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं।
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