भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य बेशक उन्हें 'ग्रैंड पा' कह रहे हैं, लेकिन मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर की गुरुवार को हैदराबाद में खेली गई एकदिवसीय इतिहास की एक बेहतरीन पारी देखकर बरबस ही मलिका पुखराजके इस प्रसिद्ध गीत की याद आ जाती है.. अभी तो मैं जवान हूँ.. सचिन का 'मास्टर क्लास' देखकर हर कोई गदगद था।
हैदराबाद के राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में बैठे लगभग 40 हजार दर्शक भाग्यशाली थे जिन्होंने अपनी आँखों से इस महान पारी को देखा। टेलीविजन पर जो दर्शक इस मैच का सीधा प्रसारण देख रहे थे वे सभी कम से कम खुद को 'लकी' महसूस कर रहे होंगे क्योंकि ऐसी पारी रोज-रोज नहीं खेली जाती।
36 वर्षीय मास्टर-ब्लास्टर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी 175 रनों की पारी से दिखाया कि टीम के सदस्य भले ही उन्हें 'ग्रैंड पा' कह रहे हों, लेकिन उनके खेल में एक युवा जैसी रवानगी है। उनके शाटों में एक अलग ही जोश है। उनकी एकाग्रता में जैसे साधना है और उनके खेल में ऐसा सम्मोहन है जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
क्रिकेट के मैदान में लगातार 20 वर्ष गुजारना सहज नहीं होता। सोलह से 36 वर्ष तक क्रिकेट का लम्बा सफर किसी को भी थका सकता है। यह स्थिति तब और भी मुश्किल हो जाती है जब उनके युवा साथी खिलाडी उन्हें 'ग्रैंड पा' कहने लगें, लेकिन अब इन युवाओं को यह एहसास भली भांति हो गया होगा कि सचिन के अंदर जो युवा छुपा बैठा है, उसके आस पास भी पहुँचना उनके बूते से बाहर है। (वार्ता)