उप्पल के राजीव गाँधी स्टेडियम पर पाँचवें वनडे मैच में सचिन तेंडुलकर के 45वें शतक (175) के बावजूद अन्य स्टार खिलाड़ियों के जल्दी-जल्दी आउट होने के कारण ऑस्ट्रेलिया ने भारत पर 3 रनों से रोमांचक जीत दर्ज की। सचिन का आउट होना ही मैच का 'टर्निंग पाइंट' था। इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया सात वनडे मैचों की सिरीज में 3-2 से आगे हो गया है।
PTI
वैसे मास्टर ब्लास्टर सचिन का जादू गुरुवार को हैदराबाद के क्रिकेट प्रेमियों के सिर चढ़कर बोला। 'मैन ऑफ द मैच' सचिन ने पहले जहाँ एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 17 हजार रन पूरे किए, वहीं दूसरी तरफ 45वाँ शतक भी जमाया और विपरीत परिस्थितियों में 175 रन की मैराथन पारी खेली।
भारतीय टीम जीत के लिए 351 रनों का पीछा करने उतरी और 49.4 ओवर में 347 रनों पर सिमट गई। अंतिम विकेट के रूप में प्रवीण कुमार रन आउट हुए। शेन वॉटसन ने 8.4 ओवरों में 47 रन देकर 3 विकेट हासिल किए।
ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में चार विकेट पर 350 रन बनाए। शान मार्श (112), शेन वॉटसन (93), रिकी पोंटिंग (45), कैमरुन व्हाइट (57) और माइकल हसी (नाबाद 31) ने भारतीय गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी।
पूरे स्टेडियम और देश की नजरें इस बात पर टिकीं थी कि हैदराबाद सचिन तेंडुलकर के 17 हजार रन का गवाह बनता है या नहीं? आखिरकार बेन हिल्फेनहास के ओवर में सचिन ने 17 हजारवाँ रन पूरा कर लिया।
जीत के लिए 351 रनों के पहाड़ का पीछा करने उतरी भारतीय टीम का पहला विकेट वीरेन्द्र सहवाग के रूप में 66 रन के कुल स्कोर पर पैवेलियन लौटा। डिल्फेनहास की गेंद पर डीप फाइन लेग से छक्का उड़ाने के प्रयास में सहवाग (38) का खूबसूरत कैच बॉलिंगर ने लपक लिया। 92 रन के कुल स्कोर पर गौतम गंभीर (8) आउट हुए। युवराज सिंह 20वें ओवर में केवल 9 रन बनाकर पैवेलियन लौट आए। कै. एडम की गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी 6 रन बनाकर वोगस द्वारा कैच आउट हो गए।
शेन वॉटसन ने अपने आठवें ओवर में भारत को दो लगातार झटके देकर मैच का रुख ऑस्ट्रेलिया की तरफ मोड़ दिया। पहले उन्होंने सुरेश रैना (59) को अपना शिकार बनाया और फिर हरभजन सिंह को खाता खोलने के पहले ही पैवेलियन की राह दिखाई। भारत 43 ओवर में 300 रनों के कुल स्कोर पर 6 विकेट गँवा चुका था। रविंदर जड़ेजा ने अपना विकेट थ्रो किया। 23 रन बनाने वाले रविंदर जड़ेजा नजदीकी रन चुराने के प्रयास में रन आउट हो गए। बाद में सचिन तेंडुलकर के आउट होने के बाद कोई दूसरा बल्लेबाज भारत को जीत दिलाने में नाकाम रहा।
सचिन जब 141 गेंदों पर 19 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 175 रन पर खेल रहे थे, तब मैके की गेंद पर ग्लांस के जरिये गेंद हवा में उड़ाने के प्रयास में हैरिट्ज द्वारा लपक लिए गए। दरअसल गेंद हैंडल के हिस्से से गई थी, वरना यह निश्चित रूप से चौका होता। सचिन और सुरेश रैना के बीच पाँचवें विकेट के लिए 167 रनों की साझेदारी निभाई गई। अंतत: भारतीय टीम 49.4 ओवर में 347 रनों पर सिमट गई।
इससे पहले शेन वॉटसन और शान मार्श ने ऑस्ट्रेलियाई पारी की बेहतरीन शुरुआत की। वॉटसन ने भारतीय गेंदबाजों की खबर लेते हुए केवल 41 गेंदों में अर्धशतक जमा दिया। वॉटसन ने अपने पहले पचास रन 5 चौके और 3 छक्कों की सहायता से बनाए।
अर्धशतक के बाद भी भारतीय गेंदबाजों पर वॉटसन का कहर जारी रहा। वॉटसन बदकिस्मती से एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पाँचवाँ शतक केवल 7 रनों से चूक गए। 93 के निजी योग पर वॉटसन हरभजनसिंह की गेंद पर रवींद्र जड़ेजा को कैच थमा बैठे। वॉटसन-मार्श ने पहले विकेट के लिए 145 रन जोड़े।
दूसरे छोर पर मार्श ने भी भारतीय गेंदबाजों को बिना किसी दबाव के खेला। उन्होंने अपना अर्धशतक 63 गेंदों में चार चौकों की मदद से पूरा किया। पहले विकेट के लिए दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई शतकीय साझेदारी से ऑस्ट्रेलिया इस मैच में मजबूत स्थिति में पहुँच गया।
इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने मैदान संभाला और स्कोर बोर्ड को गति प्रदान की। पोंटिंग और मार्श ने दूसरे विकेट के लिए 91 रन जोड़े। पोंटिंग 45 गेंदों में 45 रन बनाने के बाद प्रवीण कुमार की गेंद पर बोल्ड हुए।
एक छोर पर मार्श ने अपना स्वाभाविक खेल जारी रखा। मार्श ने एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जमाया। इसके लिए उन्होंने केवल 105 गेंदों का सामना किया और आठ चौके और एक छक्का जमाया। मार्श ने 112 गेंदों पर 112 रन बनाए और वे नेहरा की गेंद पर गंभीर के हाथों कैच आउट हुए। अंतिम ओवरों में व्हाइट और हसी ने जबरदस्त बल्लेबाजी करके ऑस्ट्रेलिया को 350 रनों के स्कोर तक पहुँचाया। (वेबदुनिया न्यूज)